Sunday, June 7, 2020

कोरोना उपचार

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
🏥बांधवांनो,,,
के.ई. एम.हॉस्पिटल
मधील एका नामांकित डॉक्टरने सदर लेख पाठविला आहे!
पूर्ण वाचा,,आणि 
निश्चिंत रहा!
 तसेच यातील उपचार पद्धती आपण आपल्या फेमिलीं डॉ.च्या 
सल्ल्यानेच करा!
 *कोरोनाला अजिबात घाबरू नका!*

1)जर सुरुवातीला सुका खोकला येत असेल तर जेवणात  चेंजेस करा, डाळ भात, खिचडी, इडली, उपमा, पोहे असे पदार्थ खा ज्यात जास्त तेल आणि मसाला जास्त नसेल.

अद्रकवाली (आले) चहा,आणि लवंग खा दिवसातून एकदा.

रोज रात्री दुधात हळदी टाकून प्या.
नियमित गरम पाणी प्या.

जास्त खोकला असेल तर 👇

🌼Tab Azee 500 1-0-1× 7 days चालू करा

🌼C Omee D 1-0-1× 7 days
15 मिनिट जेवणा अगोदर घ्या.
म्हणजे अँटिबायोटिक घेतल्याने ऍसिडिटी होणार नाही.

💪व्हिटॅमिन C साठी Tab Limcee   1-0-0× 15 दिवस

🙈2) ताप येत असेल तर Tab Dolo 650 घ्या तुम्ही दर 6 तासाने परत घेऊ शकता जास्त ताप असेल तर

🙊3) 3 दिवसात ठीक वाटायला हवे तरी दम लागायला लागला तर डॉक्टरचा सल्ला घ्या, X ray काढा.

🙊4)खोकल्याच औषध चालू करा

Syp Asthakind Dx 2 चमचे 3 वेळा 1-1-1

👇5) X Ray मध्ये न्यूमोनिया आला तर 

Tab Tamiflu 75 1-0-1× 5 days

Tab HCQS चालू करा पण त्यापूर्वी एक कार्डिओग्राम(ECG, छातीची पट्टी) काढा नॉर्मल असेल तर ह्या गोळया चालू करा.

Tab HCQS 400 1-0-1× 1 दिवस

TAB HCQS 200 1-0-1× 4 दिवस

😄हाच कोर्स चालू करतात सर्व हॉस्पिटलमध्ये फक्त एवढंच असत जास्त त्रास होत असेल कुणाला तर त्याला ऍडमिट करून उपचार करावे लागतात.
आणि ऑक्सिजन दिवसातून 18 तास तरी द्यावा लागतो.

💪80% लोक घरीच बरे होतात, फक्त ज्यांना दम लागतो असे 10% लोकांना ऍडमिट करावं लागतं.

ज्याला कोणत्याही हॉस्पिटलमध्ये बेड भेटणार नाही त्यांनी हा उपचार चालू करून स्वतःला सुरक्षित ठेवू शकता. कारण येणार काळ खूपच भीषण आहे की आपल्याला बेड पण भेटणार नाही. अशा परिस्थितीत तुमच्याकडे मी अशी माहिती पाठवतोय ज्याने तुमचा त्रास वाढणार नाही.

😇तसेच काही त्रास वाढू नये म्हणून किंवा रोगप्रतिकारक शक्ती वाढवण्यासाठी तुम्ही 
होमिओपॅथीक मेडिसिन 
Arsenic Alb 30 X 
6 गोळ्या मोठ्या माणसांना उपाशीपोटी द्यायच्या

आणि लहान मुलांना 3 गोळ्या द्यायच्या
3 दिवस रोज सकाळी उपाशीपोटी

आणि एक महिन्याने परत सेम डोस परत घ्यायचा

तुमच्यासाठी आज हा लेख  ज्यांनी लिहिला त्यांस लाख लाख धन्यवाद! कोरोनाविषयी ज्यांना योग्य माहिती नाही किंवा जे घाबरतात त्यांच्यासाठी.
आणि ज्यांना हॉस्पिटलमध्ये प्रवेश 
मिळत नाही,,,
🙏🏻अशा सर्व आपल्या गोरगरीब 
जनतेसाठी,,
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
कृपया हा लेख सर्व
सामान्यांपर्यंत पोहचू दया!
आणि आपणही संग्रही ठेवा,,
 सर्व सरकारी वा 
खाजगी रुग्णालयात
असेच उपचार केले जातात!
 आणि आपण खाजगी हॉस्पिटलमध्ये दाखल झाल्यानंतर
उगाचच लाखो रुपयांची उलाढाल करून फसतो!
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Monday, June 1, 2020

मंदिर में दर्शन के बाद बाहर सीढ़ी**पर थोड़ी देर क्यों बैठा जाता है❓*

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*प्रश्न~ मंदिर में दर्शन के बाद बाहर सीढ़ी*
        *पर थोड़ी देर क्यों बैठा जाता है❓*

     *उत्तर ~* परम्परा हैं कि किसी भी मंदिर में दर्शन के बाद बाहर आकर मंदिर की पैड़ी या ऑटले पर थोड़ी देर बैठना। क्या आप जानते हैं इस परंपरा का क्या कारण है ?
     यह प्राचीन परंपरा एक विशेष उद्देश्य के लिए बनाई गई है। वास्तव में मंदिर की पैड़ी पर बैठ कर एक श्लोक बोलना चाहिए। यह श्लोक आजकल के लोग भूल गए हैं। इस लोक को मनन करें और आने वाली पीढ़ी को भी बताएं। श्लोक इस प्रकार है ~
            *अनायासेन मरणम् ,*
            *बिना देन्येन जीवनम्।*
            *देहान्त तव सानिध्यम् ,*
            *देहि मे परमेश्वरम्॥*

      इस श्लोक का अर्थ है ~
  *अनायासेन मरणम्* अर्थात् बिना तकलीफ के हमारी मृत्यु हो और कभी भी बीमार होकर बिस्तर पर न पड़ें, कष्ट उठाकर मृत्यु को प्राप्त ना हों चलते फिरते ही हमारे प्राण निकल जाएं।
  *बिना देन्येन जीवनम्* अर्थात् परवशता का जीवन ना हो। कभी किसी के सहारे ना रहाना पड़े। जैसे कि लकवा हो जाने पर व्यक्ति दूसरे पर आश्रित हो जाता है वैसे परवश या बेबस ना हों। ठाकुर जी की कृपा से बिना भीख के ही जीवन बसर हो सकें।
  *देहांते तव सानिध्यम* अर्थात् जब भी मृत्यु हो तब भगवान के सम्मुख हो। जैसे भीष्म पितामह की मृत्यु के समय स्वयं ठाकुर (कृष्ण जी) उनके सम्मुख जाकर खड़े हो गए। उनके दर्शन करते हुए प्राण निकले।
  *देहि में परमेश्वरं* हे परमेश्वर ऐसा वरदान हमें देना।

    *भगवान से प्रार्थना करते हुऐ उपरोक्त श्र्लोक का पाठ करें।* गाड़ी, लाडी, लड़का, लड़की, पति, पत्नी, घर, धन इत्यादि (अर्थात् संसार) नहीं मांगना है, यह तो भगवान आप की पात्रता के हिसाब से खुद आपको देते हैं। इसीलिए दर्शन करने के बाद बैठकर यह प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए। यह प्रार्थना है, याचना नहीं है। याचना सांसारिक पदार्थों के लिए होती है। जैसे कि घर, व्यापार,नौकरी, पुत्र, पुत्री, सांसारिक सुख, धन या अन्य बातों के लिए जो मांग की जाती है वह याचना है वह भीख है।

     *'प्रार्थना' शब्द के 'प्र' का अर्थ होता है 'विशेष' अर्थात् विशिष्ट, श्रेष्ठ और 'अर्थना' अर्थात् निवेदन। प्रार्थना का अर्थ हुआ विशेष निवेदन।*

     मंदिर में भगवान का दर्शन सदैव खुली आंखों से करना चाहिए, निहारना चाहिए। कुछ लोग वहां आंखें बंद करके खड़े रहते हैं। आंखें बंद क्यों करना, हम तो दर्शन करने आए हैं। भगवान के स्वरूप का, श्री चरणों का, मुखारविंद का, श्रृंगार का, *संपूर्ण आनंद लें, आंखों में भर ले निज-स्वरूप को।*
      *दर्शन के बाद जब बाहर आकर बैठें, तब नेत्र बंद करके जो दर्शन किया हैं उस स्वरूप का ध्यान करें। मंदिर से बाहर आने के बाद, पैड़ी पर बैठ कर स्वयं की आत्मा का ध्यान करें तब नेत्र बंद करें और अगर निज आत्मस्वरूप ध्यान में भगवान नहीं आए तो दोबारा मंदिर में जाएं और पुन: दर्शन करें।*
             ॥ सत्यम परम् धीमहि ॥