Aadhar website वर आपले आधार कोणत्या बँकेशी link आहे हे पाहता येत नसेल तर आपल्याच Mobile मध्ये * 99 *99# dial केल्यानंतर 1 टाकून आपला 12 अंकी आधारकाडॆ नं. टाकून आपले आधार कोणत्या बँकेशी link आहे हे पाहू शकताे.
आपल्या सर्व स्टाफ ला पण सांगणे।
Sunday, September 3, 2017
आधार लिंक
Thursday, August 31, 2017
*पोराला थोडं रडू द्या*
*पोराला थोडं रडू द्या*
काल पेपर वाचताना खूप छोट्याशा अश्या एका बातमीने माझं लक्ष वेधलं...बातमी होती हिंगोली मधून...वडीलांनी १० वीचे पुस्तके आणण्यास उशीर केला म्हणून एका १० वी च्या मुलाने रागाच्या भरात गळफास घेऊन आत्महत्या केली...छोटीच बातमी पण मनाला चटका लावणारी...
आपल्या वाचनात रोज अश्या बातम्या येत असतात, त्या आपण वाचतो व सोडून देतो...पण आपण कोणीही खोलात जाऊन विचार करत नाहीत की असे का? आपण थोडस मागे म्हणजे १९८० च्या आसपास किंवा त्या दरम्यान...म्हणजे आता जे लोक वय वर्ष ४५ च्या आसपास आहेत ते, शाळे मध्ये जाताना खाकी चड्डी व पांढरा शर्ट शाळेचा गणवेश असायचा तो आपल्याला मिळायचा नाही,आपल्या मोठ्या भावाचा आणि मुलींना मोठ्या बहिणीचा वापरावा लागत होता, आणि त्यालाच नीटनिटके करून आपल्याला ते वापरावे लागत होते, तशीच अवस्था आपल्या पुस्तकांची होती, पुढच्या वर्गातील मुलांची जुनी पुस्तके अर्ध्या किमतीत घ्याची आणि ती परत कव्हर लावू फाटलेली पुस्तके वर्षभर काळजीपूर्वक वापरायची आणि परत विकायची.
आताच्या मुलांना ठिगळ हा शब्दच आठवत नाही...आणि त्यांना ते काय असते ते हि माहित नाही...ते सरळ आपल्यालाच विचारतील ते काय असत! आपल्या वेळेस घरची परिस्थिती खूपच हलाखीची असल्याने वर्गातील अनेकांच्या चड्डीवर ठिगळं दिसायची...साधारण १९९५ नंतर जसे आर्थिक स्वायतेचे वारे आले आणि अनेकांच्या हातात थोडा फार पैसे येयाला लागला तसे अनेक प्रश्न निर्माण होत गेले...
आई सुद्धा जन्मलेल्या मुलाला रडल्याशिवाय दूध पाजत नाही...पण आज आपण समाजमध्ये पाहतोय कि बऱ्याच गरज नसलेल्या गोष्टी मुलांच्या हातात येत आहेत, लहान पणा पासूनच आपण पालक म्हणून मुलांना गरज नसताना सुद्धा उलट्या होई पर्यंत देतो...आज लहान मुलांच्या हातात अनेक गॅजेट्स आले आहेत, व्हाट्सअप्प, फेसबुक, इंटरनेट, केबल टीव्ही आणि इतर अनेक त्यामुळे त्यावरील बऱ्याच गोष्टी मुळे मुले जास्त आभासी दुनियेत वावरतात... पालक म्हणून आपण त्याला कशालाच नाही म्हणत नाहीत...
आज आपल्या देशात लेकरू पहिलीला आल्या पासून त्याला आपण अपंग करतोय असे माझे वैयक्तिक मत आहे,त्याला पुस्तके फुकट, वह्या फुकट, पाटी फुकट, दुपारी मस्तपैकी पोषण आहार, दप्तर फुकट आणि शिवाय त्याला नापास करायचे नाही...कशाला अभ्यास करतंय ते मग...त्याला जर सगळंच विना कष्टाचे मिळत असेल तर पुढे काय होईल...एक ऐत खाऊ पिढी तयार होईल...आज आपण विध्यार्थ्यांना उलट्या होई पर्यंत देत आहोत, त्याला त्याची काहीच गरज नाही, शाळेत मिळणार्या फुकट पुस्तकाची किमत सुद्धा आज पालकांना माहित नाही हे खूप मोठे दुर्दैव म्हणावे लागेल...
आज बऱ्याच शाळां मधून प्राथमिक स्तरावरील विध्यार्थ्यांना इंटरनेट चे शिक्षण दिले जाते...वास्तविक पाहता एकदम चुकीची पद्धत आहे ती...आणि काय शिकवावं आणि कुठे शिकवावं हे पैसा जास्त झाल्यामुळे पालकांना कळत नाही...
आज मुलांना मैदानी खेळ नको वाटतात, त्यामुळे त्याचा आपल्या वयोगटातील मुलामध्ये मिसळण्याची सवयच नाही राहिली, घरी कोणी वडीलधारी मंडळी आली तर कसे वागावे याचे सामाजिक भान पण आज लोप पावत चालले आहे...
सगळंच आयत आणि विना कष्ट मिळत असल्याने आजच्या पिढीला नाही ऐकायची सवयच नाही राहिली, ना परिस्थितीची जाण ना कशाची भीती...मुलांच्या तोडातून एकदा शब्द बाहेर पडे पर्यंत ती वस्तू त्या समोर हजर... आणि ज्या वेळेस हि मूल वयात येतात...त्या वेळी आपल्या हातातून सर्व परिस्थिती बाहेर गेलेली असते, एकादी गोष्ट नाही मिळाली तर ही मुलं त्यामुळे खूप टोकाची पावलं उचलतात, नाही ऐकण्याची सवय नसल्यामुळे ती खूप आक्रमक झालेली असतात...
लाड करावेत पण ते हि नियंत्रणात...आज मुलाच्या बाबतीत प्रत्येक पालक नको तितका जागरूक झाला आहे,पालकांच्या भल्या मोठ्या अपेक्षा वाढलेल्या आहेत, काय करावे आणि काय नाही तेही आज समजण्याच्या पलीकडे गेलं आहे...
कष्टाला दुसरा कोणताही शॉर्टकट नाही हे त्या मुलांना बालपणी पासूनच मनावर बिबविण्याची गरज आहे...
तरच हे बालकं टिकतील...म्हणून म्हणतो की मुलांना थोडं रडू द्या...थोडं रडू द्या...!!
Friday, August 25, 2017
भयंकर से भयंकर बीमारी की कमर कैसे तोड़ देता है गुड
जानिए, भयंकर से भयंकर बीमारी की कमर कैसे तोड़ देता है गुड
3 Aug. 2017
sagar all news
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दोस्तों आज के समय में हमारा खान पान इतना ख़राब हो गया ही की कुछ पूछिए ही मत ऐसे में हमें पता नहीं कितनी बीमारियों और मुसीबतों का सामना करना पड़ता है, तो इसलिए आज हम जानेंगे गुड के बारे में की गुड किन किन बीमारियों से लड़ता है |
गुड एक ऐसा पदार्थ है जो कि जितने आपको फायदे फलों से मिलते हैं उतने ही फायदे आपको गुड से भी मिल सकती है गुड में भरपूर मात्रा में मिनरल पाए जाते हैं फाइबर कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन और आयरन होता है जो कि आपकी सेहत और आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरूरी है अगर हम चीनी से कंपीयर करें तो वह आपकी सेहत के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक भी है डायबिटीज वालों के लिए गुड का सेवन बहुत अच्छा है क्यों कि चीनी उनके लिए नुकसानदायक है और गुण उनके लिए फायदेमंद है, अगर हम बात करे आपके शरीर की तो शरीर के लिए गुड बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है अगर आप गुड का सेवन करते हैं तो इससे आपके शरीर में विषैले पदार्थ पर निकल जाते हैं और फूड पाइप पेट के लिए और गुर्दे या किडनी के लिए बहोत ही लाभ्फ्दयाद्क यह आप को स्वस्थ रखने के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है गुड पेट में होने वाली समस्याओं को कभी होने नहीं देता जैसे की कब्ज एसिडिटी ऐसी समस्या कभी भी नहीं आती गुड में भरपूर मात्रा में पोटेशियम होता है जिससे आपका पाचन तंत्र बिलकुल सही रहता है बड़ी से बड़ी बीमारी को यह सही कर सकता है अगर आपको गुर्दे जैसी कोई भी समस्या है तो अगर आप नियमित रुप से गुड़ का सेवन करेंगे तो आपकी गुर्दे जैसी समस्या सही हो सकती है, इस में भरपूर मात्रा में आयरन भी होता है जो कि खून को साफ करता है और हिमोग्लोबिन स्तर को बढ़ाता है और जोकि एनीमिया के रोगियों के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक या अनीमिया के रोगी गुड़ का सेवन अवश्य करें क्योंकि उनके लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक है और दोस्तों अगर आप अपने पेट को कम करना चाहते हैं तो गुड वाली चाय जरूर पिए अगर आप चीनी वाली चाय पीती हैं तो इससे आपका वेट बढ़ता है चीनी को छोड़कर अगर आप चीनी की जगह पर गुड़ का सेवन करें तो इस से आपका वेट भी बहुत जल्दी कम हो जाएगा देखा आपने की बहुत सारी समस्याओं को सही कर सकता है अकेला गुण |
Thursday, August 10, 2017
सिर्फ दो कपूर बना देगा अंबानी जितना अमीर
सिर्फ दो कपूर बना देगा अंबानी जितना अमीर
5 Jul. 2017
SWEET SOLUTION
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Camphor
अमीर बनने की चाहत सबको होती है, हर किसी के मन में अमीर बनने की चाह होती है और साथ ही लोग इसके लिए मेहनत भी खूब करते हैं। पर कई लोग मेहनत और लगन करने के बावजूद भी अमिर नहीं बन पाते, पूरी जिंदगी पैसों की कमी इंसान के सपनों को पूरा करने से रोक देती है। ऐसे में अगर कुछ खास उपाय हो जाए तो इसका फायदा हर किसी को प्राप्त हो सकता है, आज हम बताएंगे कि आपको सिर्फ मात्र एक कपूर का ढेली आपको बना सकता है अंबानी जितना अमीर। कर्पूर या कपूर मोम की तरह उड़नशील दिव्य वानस्पतिक द्रव्य है। इसे अक्सर आरती के बाद या आरती करते वक्त जलाया जाता है जिससे वातावरण में सुगंध फैल जाती है और मन एवं मस्तिष्क को शांति मिलती है।यदि आप निर्देशानुसार इसका प्रयोग करेंगे, तो यह वाकई चमत्कार दिखाएगा।
Camphor
कपूर के बहुत सारे फायदे हैं क्या आप जानते हैं कि घर में पॉजिटिविटी लाने के लिए कपूर बहुत फायदेमंद है। रोज सुबह और शाम को कपूर को धीमे में जलाएं और पूरे घर में इसकी खुशबू फैलाएं इससे घर में शांति बनी रहती है। वही पैसों के लिए कपूर का एक फायदेमंद उपाय है रात के समय में चांदी की कटोरी में कपूर और लौंग को जलाएं और इस उपाय को कुछ दिनों तक रोजाना करें निश्चित रूप से आपको फल की प्राप्ति होगी। वही सौभाग्य के लिए भी कपूर फायदेमंद है इस प्रक्रिया में 12 साबुदाने लेकर कपूर की मदद से जलाएं यह उपाय किसी भी दिन में किया जा सकता है किंतु अगर बृहस्पतिवार को किया जाए तो इसे अधिक शुभ माना जाता है। वही किस्मत चमकाने के लिए भी कपूर का बहुत बड़ा रोल होता है शनिवार के दिन कपूर के तेल की दो बूंदों को पानी में डालें और फिर इस पानी को स्नान के लिए इस्तेमाल करें। दुर्घटना से बचाव के लिए कपूर फायदेमंद है रात के समय में कपूर को जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
Saturday, August 5, 2017
जानें! कैसे हुई थी संडे की छुट्टी की शुरूआत नासिर हुसैन |
जानें! कैसे हुई थी संडे की छुट्टी की शुरूआत
नासिर हुसैन |
यार संडे को चलते हैं न घूमने। फिक्र नॉट, संडे को करते हैं पार्टी। पक्का भाग्यवान इस संडे को काम पूरा कर दूंगा।
नई दिल्ली। यार संडे को चलते हैं न घूमने। फिक्र नॉट, संडे को करते हैं पार्टी। पक्का भाग्यवान इस संडे को काम पूरा कर दूंगा। इस संडे तो कहीं नहीं जा रहा, पूरा दिन आराम करुंगा। उफ्फ, एक संडे और इतने काम। हां जी हो भी क्यों न, आखिर संडे को छुट्टी जो मिलती है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि हमारे लिए संडे की छुट्टी कराने वाले कौन थे। किस लिए संडे की छुट्टी दिलाई गई थी। संडे की छुट्टी कोई एक दिन में घोषित नहीं हो गई थी। इसके लिए बकायदा आठ साल तक लम्बी लड़ाई लड़ी गई थी। तब कहीं जाकर अंग्रेज अफसरों ने संडे की छुट्टी घोषित की थी। और इस आंदोलन के अगुआ थे नारायण मेघाजी लोखंडे।
बात अंग्रेजी शासनकाल की है। कपड़ा और दूसरे तरह की मिलों में भारतीय मजदूरों की बड़ी संख्या थी। लेकिन उन भारतीय मजदूरों की आवाज उठाने वाला कोई नहीं था। इसी दौरान नारायण मेघाजी लोखंडे मजदूरों के हक में आवाज उठाई। कहा जाता है कि लोखंडे ही वो श्ख्स थे जिन्होंने मिल मजदूरों के हक में पहली बार आवाज उठाई थी। लोखंडे को श्रम आंदोलन का जनक भी कहा जाता है। भारत में ट्रेड यूनियन का पिता भी कहा जाता है। आंदोलन में ज्योतिबाफुले का साथ भी लोखंडे को मिला था। वर्ष 1881 में लोखंडे ने मिल मजदूरों के लिए संडे की छुट्टी करने की मांग रखी। लेकिन अंग्रेज अफसर इसके लिए तैयार नहीं हुए।
संडे की छुट्टी के संबंध में लोखंडे का तर्क था कि सप्ताह के सात दिन मजदूर काम करते हैं, लिहाजा उन्हें सप्ताह में एक छुट्टी भी मिलनी चाहिए। संडे की छुट्टी लेना इतना आसान नहीं था, लिहाजा लोखंडे को इसके लिए एक आंदोलन छेड़ना पड़ा। आंदोलन वर्ष 1881 से लेकर 1889 तक चला। इतना ही नहीं लोखंडे ने मजदूरों के हक में इन मांग को भी अंग्रेज अफसरों के सामने उठाया था। दोपहर में आधा घंटे का खाने के लिए अवकाश, हर महीने की 15 तारीख तक वेतन मजदूरों को मिल जाए और काम के घंटे तय हो जाएं।
पिकनिक मनाने के लिए नहीं मिली थी संडे की छुट्टी
मौजूद दस्तावेजों की मानें तो मजदूरों के लिए लोखंडे ने संडे की छुट्टी पिकनिक मनाने या पत्नी के बताए घर के तमाम काम पूरा करने के लिए नहीं मांगी थी। छुट्टी लेने के पीछे उनका तर्क था कि सप्ताह के सात दिन मजदूर अपने परिवार के लिए काम करते हैं। एक दिन देश और समाज के लिए भी होना चाहिए। जिससे वो देश और समाज हित में भी काम कर सकें।
