Sunday, September 27, 2026

'माउंट ब्रोमो' पर विराजमान हमारे प्रथम पूज्य भगवान 'विघ्नहर्ता' गणपति



एक तरफ हजारों फीट ऊंचा खौफनाक गर्जना के साथ आग, धुंआ और लावा उगलता ज्वालामुखी, दूसरी ओर उसी के मुहाने पर शांति से विराजमान हमारे प्रथम पूज्य भगवान 'विघ्नहर्ता' गणपति. किसी सक्रिय वोल्केनो की नोक पर बैठे ये दुनिया के इकलौते श्रीगणेश हैं, जो न सिर्फ दर्शन के लिए आने वाले अपने भक्तों को रक्षा करने के साथ पूरे इलाके के एकमात्र अधिपति हैं. मौत के खतरों से भरे 'माउंट ब्रोमो' पर करीब 700 सालों से स्थापित गजानन ये अभय वरदान देते हैं कि डरने की जरूरत नहीं. मैं साक्षात यहां मौजूद हूं.

सनातन धर्म की मान्यताओं और पूजा-पद्धति में सिर्फ देवाधिदेव महादेव ही अकेले प्रकृति प्रेमी औक माउंटेन लवर नहीं, जो उस कैलाश पर्वत के वासी हैं, जहां आज तक कोई मनुष्य नहीं जा सका. उनके दोनों सुपुत्र गणेश और कार्तिकेय भी सुदूर ऊंचे पहाड़ियों पर विराजित हैं जो शिवजी की तरह अपने भक्तों की पुकार सुनकर क्षणभर में उनके संकट हर लेते हैं. हालांकि भगवान गणेश और स्वामी कार्तिकेय के पहाड़ों पर बसे मंदिरों पर आप जाकर दर्शन कर सकते हैं, लेकिन कैलाश जाना किसी साधारण इंसान के बस की बात नहीं है.

इंडोनेशिया के मशहूर और बेहद सक्रिय ज्वालामुखी 'माउंट ब्रोमो' के बिल्कुल किनारे पर गणपति बप्पा की यह प्रतिमा स्थापित है. गणेश चतुर्थी के मौके पर जब लाखों भक्त बप्पा को अपने घरों में बिठा रहे हैं, तब जानते हैं देश से हजारों किलोमीटर दूर बसे इस अलौकिक गणेश धाम की पूरी कहानी.


 

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