Friday, August 21, 2020

कथा घर से भागनेवाली लाडकी

ट्रैन के ए.सी. कम्पार्टमेंट में मेरे सामने की सीट पर बैठी लड़की ने मुझसे पूछा " हैलो, क्या आपके पास इस मोबाइल की सिम निकालने की पिन है??" 

उसने अपने बैग से एक फोन निकाला था, और नया सिम कार्ड उसमें डालना चाहती थी। लेकिन सिम स्लॉट खोलने के लिए पिन की जरूरत पड़ती है जो उसके पास नहीं थी। मैंने हाँ में गर्दन हिलाई और अपने क्रॉस बेग से पिन निकालकर लड़की को दे दी। लड़की ने थैंक्स कहते हुए पिन ले ली और सिम डालकर पिन मुझे वापिस कर दी। 

थोड़ी देर बाद वो फिर से इधर उधर ताकने लगी, मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने पूछ लिया "कोई परेशानी??"

वो बोली सिम स्टार्ट नहीं हो रही है, मैंने मोबाइल मांगा, उसने दिया। मैंने उसे कहा कि सिम अभी एक्टिवेट नहीं हुई है, थोड़ी देर में हो जाएगी। और एक्टिव होने के बाद आईडी वेरिफिकेशन होगा उसके बाद आप इसे इस्तेमाल कर सकेंगी। 

लड़की ने पूछा, आईडी वेरिफिकेशन क्यों?? 

मैंने कहा " आजकल सिम वेरिफिकेशन के बाद एक्टिव होती है, जिस नाम से ये सिम उठाई गई है उसका ब्यौरा पूछा जाएगा बता देना"

लड़की बुदबुदाई  "ओह्ह "

मैंने दिलासा देते हुए कहा "इसमे कोई परेशानी की कोई बात नहीं"

वो अपने एक हाथ से दूसरा हाथ दबाती रही, मानो किसी परेशानी में हो। मैंने फिर विन्रमता से कहा "आपको कहीं कॉल करना हो तो मेरा मोबाइल इस्तेमाल कर लीजिए"

लड़की ने कहा "जी फिलहाल नहीं, थैंक्स, लेकिन ये सिम किस नाम से खरीदी गई है मुझे नहीं पता"

मैंने कहा "एक बार एक्टिव होने दीजिए, जिसने आपको सिम दी है उसी के नाम की होगी" 

उसने कहा "ओके, कोशिश करते हैं" 

मैंने पूछा "आपका स्टेशन कहाँ है??"

लड़की ने कहा "दिल्ली"

और आप?? लड़की ने मुझसे पूछा 

मैंने कहा "दिल्ली ही जा रहा हूँ, एक दिन का काम है,

आप दिल्ली में रहती हैं या...?"

लड़की बोली "नहीं नहीं, दिल्ली में कोई काम नहीं , ना ही मेरा घर है वहाँ"

तो ???? मैंने उत्सुकता वश पूछा

वो बोली "दरअसल ये दूसरी ट्रेन है, जिसमे आज मैं हूँ, और दिल्ली से तीसरी गाड़ी पकड़नी है, फिर हमेशा के लिए आज़ाद" 

आज़ाद?? 
लेकिन किस तरह की कैद से?? 
मुझे फिर जिज्ञासा हुई किस कैद में थी ये कमसिन अल्हड़ सी लड़की.. 

लड़की बोली, उसी कैद में थी जिसमें हर लड़की होती है। जहाँ घरवाले कहे शादी कर लो, जब जैसा कहे वैसा करो। मैं घर से भाग चुकी हुँ..

मुझे ताज्जुब हुआ मगर अपने ताज्जुब को छुपाते हुए मैंने हंसते हुए पूछा "अकेली भाग रही हैं आप? आपके साथ कोई नजर नहीं आ रहा? "

वो बोली "अकेली नहीं, साथ में है कोई"

कौन? मेरे प्रश्न खत्म नहीं हो रहे थे

दिल्ली से एक और ट्रेन पकड़ूँगी, फिर अगले स्टेशन पर वो जनाब मिलेंगे, और उसके बाद हम किसी को नहीं मिलेंगे..

ओह्ह, तो ये प्यार का मामला है। 

उसने कहा "जी"

मैंने उसे बताया कि 'मैंने भी लव मैरिज की है।'

ये बात सुनकर वो खुश हुई, बोली "वाओ, कैसे कब?" लव मैरिज की बात सुनकर वो मुझसे बात करने में रुचि लेने लगी

मैंने कहा "कब कैसे कहाँ? वो मैं बाद में बताऊंगा पहले आप बताओ आपके घर में कौन कौन है?

उसने होशियारी बरतते हुए कहा " वो मैं आपको क्यों बताऊं? मेरे घर में कोई भी हो सकता है, मेरे पापा माँ भाई बहन, या हो सकता है भाई ना हो सिर्फ बहने हो, या ये भी हो सकता है कि बहने ना हो और 2-4 गुस्सा करने वाले बड़े भाई हो" 

मतलब मैं आपका नाम भी नहीं पूछ सकता "मैंने काउंटर मारा"

वो बोली, 'कुछ भी नाम हो सकता है मेरा, टीना, मीना, रीना, कुछ भी' 

बहुत बातूनी लड़की थी वो.. थोड़ी इधर उधर की बातें करने के बाद उसने मुझे टॉफी दी जैसे छोटे बच्चे देते हैं क्लास में, 
बोली आज मेरा बर्थडे है। 

मैंने उसकी हथेली से टॉफी उठाते बधाई दी और पूछा "कितने साल की हुई हो?"

वो बोली "18" 

"मतलब भागकर शादी करने की कानूनी उम्र हो गई आपकी" 

वो "हंसी"

कुछ ही देर में काफी फ्रैंक हो चुके थे हम दोनों। जैसे बहुत पहले से जानते हो एक दूसरे को.. 

मैंने उसे बताया कि "मेरी उम्र 35 साल है, यानि 17 साल बड़ा हुँ"

उसने चुटकी लेते हुए कहा "लग तो नही रहे हो"

मैं मुस्कुरा दिया

मैंने उसे पूछा "तुम घर से भागकर आई हो, तुम्हारे चेहरे पर चिंता के निशान जरा भी नहीं है, इतनी बेफिक्री मैंने पहली बार देखी" 

खुद की तारीफ सूनकर वो खुश हुई, बोली "मुझे उन जनाब ने मेरे लवर ने पहले से ही समझा दिया था कि जब घर से निकलो तो बिल्कुल बिंदास रहना, घरवालों के बारे में बिल्कुल मत सोचना, बिल्कुल अपना मूड खराब मत करना, सिर्फ मेरे और हम दोनों के बारे में सोचना और मैं वही कर रही हूँ"

मैंने फिर चुटकी ली, कहा "उसने तुम्हे मुझ जैसे अनजान मुसाफिरों से दूर रहने की सलाह नहीं दी?"

उसने हंसकर जवाब दिया "नहीं, शायद वो भूल गया होगा ये बताना"

मैंने उसके प्रेमी की तारीफ करते हुए कहा " वैसे तुम्हारा बॉय फ्रेंड काफी टेलेंटेड है, उसने किस तरह से तुम्हे अकेले घर से रवाना किया, नई सिम और मोबाइल दिया, तीन ट्रेन बदलवाई.. ताकि कोई ट्रेक ना कर सके, वेरी टेलेंटेड पर्सन"

लड़की ने हामी भरी, " बोली बहुत टेलेंटेड है वो, उसके जैसा कोई नहीं"

मैंने उसे बताया कि "मेरी शादी को 10 साल हुए हैं, एक बेटी है 8 साल की और एक बेटा 1 साल का, ये देखो  उनकी तस्वीर" 

मेरे फोन पर बच्चों की तस्वीर देखकर उसके मुंह से निकल गया "सो क्यूट"

मैंने उसे बताया कि "ये जब पैदा हुई, तब मैं कुवैत में था, एक पेट्रो कम्पनी में बहुत अच्छी जॉब थी मेरी, बहुत अच्छी सेलेरी थी.. फिर कुछ महीनों बाद मैंने वो जॉब छोड़ दी, और अपने ही कस्बे में काम करने लगा।" 

लड़की ने पूछा जॉब क्यों छोड़ी?? 

मैंने कहा "बच्ची को पहली बार गोद में उठाया तो ऐसा लगा जैसे मेरी दुनिया मेरे हाथों में है, 30 दिन की छुट्टी पर घर आया था, वापस जाना था लेकिन जा ना सका। इधर बच्ची का बचपन खर्च होता रहे उधर मैं पूरी दुनिया कमा लूं, तब भी घाटे का सौदा है। मेरी दो टके की नौकरी, बचपन उसका लाखों का.." 

उसने पूछा "क्या बीवी बच्चों को साथ नहीं ले जा सकते थे वहाँ?"

मैंने कहा "काफी टेक्निकल मामलों से गुजरकर एक लंबे समय के बाद रख सकते हैं, उस वक्त ये मुमकिन नहीं था.. मुझे दोनों में से एक को चुनना था, आलीशान रहन सहन के साथ नौकरी या परिवार.. मैंने परिवार चुना अपनी बेटी को बड़ा होते देखने के लिए। मैं कुवैत वापस गया था, लेकिन अपना इस्तीफा देकर लौट आया।"

लड़की ने कहा "वेरी इम्प्रेसिव"  

मैं मुस्कुराकर खिड़की की तरफ देखने लगा

लड़की ने पूछा "अच्छा आपने तो लव मैरिज की थी न,फिर आप भागकर कहाँ गए??
कैसे रहे और कैसे गुजरा वो वक्त??

उसके हर सवाल और हर बात में मुझे महसूस हो रहा था कि ये लड़की लकड़पन के शिखर पर है, बिल्कुल नासमझ और मासूम छोटी बहन सी। 

मैंने उसे बताया कि हमने भागकर शादी नहीं की, और ये भी है कि उसके पापा ने मुझे पहली नजर में सख्ती से रिजेक्ट कर दिया था।" 

उन्होंने आपको रिजेक्ट क्यों किया?? लड़की ने पूछा

मैंने कहा "रिजेक्ट करने का कुछ भी कारण हो सकता है, मेरी जाति, मेरा काम,,घर परिवार,

"बिल्कुल सही", लड़की ने सहमति दर्ज कराई और आगे पूछा "फिर आपने क्या किया?"

मैंने कहा "मैंने कुछ नहीं किया,उसके पिता ने रिजेक्ट कर दिया वहीं से मैंने अपने बारे में अलग से सोचना शुरू कर दिया था। खुशबू ने मुझे कहा कि भाग चलते हैं, मेरी वाइफ का नाम खुशबू है..मैंने दो टूक मना कर दिया। वो दो दिन तक लगातार जोर देती रही, कि भाग चलते हैं। मैं मना करता रहा.. मैंने उसे समझाया कि "भागने वाले जोड़े में लड़के की इज़्ज़त पर पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता, जबकि लड़की के पूरे कुल की इज्ज़त धुल जाती है। भगाने वाला लड़का उसके दोस्तों में हीरो माना जाता है लेकिन इसके विपरीत जो लड़की प्रेमी संग भाग रही है वो कुल्टा कहलाती है, मुहल्ले के लड़के उसे चालू कहते है । बुराइयों के तमाम शब्दकोष लड़की के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं। भागने वाली लड़की आगे चलकर 60 साल की वृद्धा भी हो जाएगी तब भी जवानी में किये उस कांड का कलंक उसके माथे पर से नहीं मिटता। मैं मानता हूँ कि लड़का लड़की को तौलने का ये दोहरा मापदंड गलत है, लेकिन हमारे समाज में है तो यही , ये नजरिया गलत है मगर सामाजिक नजरिया यही है, 

वो अपने नीचे का होंठ दांतो तले पीसने लगी, उसने पानी की बोतल का ढक्कन खोलकर एक घूंट पिया। 

मैंने कहा अगर मैं उस दिन उसे भगा ले जाता तो उसकी माँ तो शायद कई दिनों तक पानी भी ना पीती। इसलिए मेरी हिम्मत ना हुई कि ऐसा काम करूँ.. मैं जिससे प्रेम करूँ उसके माँ बाप मेरे माँ बाप के समान ही है। चाहे शादी ना हो, तो ना हो।

कुछ पल के लिए वो सोच में पड़ गई , लेकिन मेरे बारे में और अधिक जानना चाहती थी, उसने पूछा "फिर आपकी शादी कैसे हुई???

मैंने बताया कि " खुशबू की सगाई कहीं और कर दी गई थी। धीरे धीरे सबकुछ नॉर्मल होने लगा था। खुशबू और उसके मंगेतर की बातें भी होने लगी थी फोन पर, लेकिन जैसे जैसे शादी नजदीक आने लगी, उन लोगों की डिमांड बढ़ने लगी"

डिमांड मतलब 'लड़की ने पूछा'

डिमांड का एक ही मतलब होता है, दहेज की डिमांड। परिवार में सबको सोने से बने तोहफे दो, दूल्हे को लग्जरी कार चाहिए, सास और ननद को नेकलेस दो वगैरह वगैरह, बोले हमारे यहाँ रीत है। लड़का भी इस रीत की अदायगी का पक्षधर था। वो सगाई मैंने तुड़वा डाली..इसलिए नही की सिर्फ मेरी शादी उससे हो जाये बल्कि ऐसे लालची लोगों में खुशबू कभी खुश नही रह सकती थी ना उसका परिवार, फिर किसी तरह घरवालों को समझा बुझा कर मैं फ्रंट पर आ गया और हमारी शादी हो गई। ये सब किस्मत की बात थी.. 

लड़की बोली "चलो अच्छा हुआ आप मिल गए, वरना वो गलत लोगों में फंस जाती" 

मैंने कहा "जरूरी नहीं कि माता पिता का फैसला हमेशा सही हो, और ये भी जरूरी नहीं कि प्रेमी जोड़े की पसन्द सही हो.. दोनों में से कोई भी गलत या सही हो सकता है..काम की बात यहाँ ये है कि कौन ज्यादा वफादार है।"

लड़की ने फिर से पानी का घूंट लिया और मैंने भी.. लड़की ने तर्क दिया कि "हमारा फैसला गलत हो जाए तो कोई बात नहीं, उन्हें ग्लानि नहीं होनी चाहिए"

मैंने कहा "फैसला ऐसा हो जो दोनों का हो,बच्चो और माता पिता दोनों की सहमति, वो सबसे सही है। बुरा मत मानना मैं कहना चाहूंगा कि तुम्हारा फैसला तुम दोनों का है, जिसमे तुम्हारे पेरेंट्स शामिल नहीं है, ना ही तुम्हे इश्क का असली मतलब पता है अभी"

उसने पूछा "क्या है इश्क़ का सही अर्थ?" 

मैंने कहा "तुम इश्क में हो, तुम अपना सबकुछ छोड़कर चली आई ये सच्चा इश्क़ है, तुमने दिमाग पर जोर नहीं दिया ये इश्क है, फायदा नुकसान नहीं सोचा ये इश्क है...तुम्हारा दिमाग़ दुनियादारी के फितूर से बिल्कुल खाली था, उस खाली जगह में इश्क का फितूर भर दिया गया। जिन जनाब ने इश्क को भरा क्या वो इश्क में नहीं है.. यानि तुम जिसके साथ जा रही हो वो इश्क में नहीं, बल्कि होशियारी हीरोगिरी में है। जो इश्क में होता है वो इतनी प्लानिंग नहीं कर पाता है, तीन ट्रेनें नहीं बदलवा पाता है, उसका दिमाग इतना काम ही नहीं कर पाता.. कोई कहे मैं आशिक हुँ, और वो शातिर भी हो ये नामुमकिन है।

मजनू इश्क में पागल हो गया था, लोग पत्थर मारते थे उसे, इश्क में उसकी पहचान तक मिट गई। उसे दुनिया मजनू के नाम से जानती है जबकि उसका असली नाम कैस था जो नहीं इस्तेमाल किया जाता। वो शातिर होता तो कैस से मजनू ना बन पाता। फरहाद ने शीरीं के लिए पहाड़ों को खोदकर नहर निकाल डाली थी और उसी नहर में उसका लहू बहा था, वो इश्क़ था। इश्क़ में कोई फकीर हो गया, कोई जोगी हो गया, किसी मांझी ने पहाड़ तोड़कर रास्ता निकाल लिया..किसी ने अतिरिक्त दिमाग़ नहीं लगाया..चालाकी नही की

लालच ,हवस और हासिल करने का नाम इश्क़ नहीं है.. इश्क समर्पण करने को कहते हैं जिसमें इंसान सबसे पहले खुद का समर्पण करता है, जैसे तुमने किया, लेकिन तुम्हारा समर्पण हासिल करने के लिए था, यानि तुम्हारे इश्क में लालच की मिलावट हो गई ।

लकड़ी अचानक से खो सी गई.. उसकी खिलख़िलाहट और लपड़ापन एकदम से खमोशी में बदल गया.. मुझे लगा मैं कुछ ज्यादा बोल गया, फिर भी मैंने जारी रखा, मैंने कहा " प्यार तुम्हारे पापा तुमसे करते हैं, कुछ दिनों बाद उनका वजन आधा हो जाएगा, तुम्हारी माँ कई दिनों तक खाना नहीं खाएगी ना पानी पियेगी.. जबकि आपको अपने आशिक को आजमा कर देख लेना था, ना तो उसकी सेहत पर फर्क पड़ता, ना दिमाग़ पर, वो अक्लमंद है, अपने लिए अच्छा सोच लेता।
आजकल गली मोहल्ले के हर तीसरे लौंडे लपाटे को जो इश्क हो जाता है, वो इश्क नहीं है, वो सिनेमा जैसा कुछ है। एक तरह की स्टंटबाजी, डेरिंग, अलग कुछ करने का फितूर..और कुछ नहीं।

लड़की का चेहरे का रंग बदल गया, ऐसा लग रहा था वो अब यहाँ नहीं है, उसका दिमाग़ किसी अतीत में टहलने निकल गया है। मैं अपने फोन को स्क्रॉल करने लगा.. लेकिन मन की इंद्री उसकी तरफ थी। 

थोड़ी ही देर में उसका और मेरा स्टेशन आ गया.. बात कहाँ से निकली थी और कहाँ पहुँच गई.. उसके मोबाइल पर मैसेज टोन बजी, देखा, सिम एक्टिवेट हो चुकी थी.. उसने चुपचाप बैग में से आगे का टिकट निकाला और फाड़ दिया.. मुझे कहा एक कॉल करना है, मैंने मोबाइल दिया.. उसने नम्बर डायल करके कहा "सोरी पापा, और सिसक सिसक कर रोने लगी, सामने से पिता भी फोन पर बेटी को संभालने की कोशिश करने लगे.. उसने कहा पिताजी आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए मैं घर आ रही हूँ..दोनों तरफ से भावनाओ का सागर उमड़ पड़ा"

हम ट्रेन से उतरे, उसने फिर से पिन मांगी, मैंने पिन दी.. उसने मोबाइल से सिम निकालकर तोड़ दी और पिन मुझे वापस कर दिया

कहानी को अंत तक पढ़ने का धन्यवाद।
 देश की सभी बेटियों को समर्पित- 
ये मेरा दावा है माता पिता से ज्यादा तुम्हे दुनिया मे कोई प्यार नहीं करता। 
कहानी पढ कर,शेयर अवश्य कीजिएगा,शायद कोई परिवार,कोई बेटी और उनका भविष्य इससे बच जाए🙏🏻

प्रेषक-भारत का हर पिता

Tuesday, August 4, 2020

👌🔱

👌🔱

```When Modi came to Delhi in 2014 he thought he'll create a Gujarat model. Kept talking about it.
He realised that the judiciary was still with Congress. Media was with Congress. Bureaucracy was with Congress. He just had Lok Sabha with him, not even the entire Rajya Sabha. 
BJP tried to nail Vadra, Raja & Kanimozhi for 2G and P. Chidambaram. They also tried to touch the others. But they couldn't. 
Modi wasn't expected to last beyond one term. But they didn't bargain for the crafty Modi mind. He pulled out a couple of magic public pulling events and he became a huge crowd gatherer with the Non Resident Indian crowd. He promised change. He promised to break the Congress loot maar ideology which kept India a poor country but made the Congress leaders rich. 
Thus he got through 2019. 
Now he's got more power. He's got another four years. 
Within the first year he put his hand on P. Chidambaram. That man is untouchable. Finally he was charged. FIR filed. Put in judicial custody for interrogation for 106 days. That's not a joke. 
P C's dream legal team would not let that happen..They were brains and brawn put together. A mean team that knew the Supreme Court well. They knew how to manipulate the system, grease it and get the best out of it. Yet, despite everything they tried - they couldn't get their man out. The crowd waving Chidambaram who went in on day one, saying he'll be back for breakfast, took 106 days to return home. Unless the Gov had something to get him into Tihar Jail they couldn't have put him there simply because Amit Shah wanted it that way. PC's dream legal team wouldn't have it. 

Now with the Covid Case on. You think it's just a case of A lockdown.
This wasn't a lockdown about corona at all.
It was about bringing in New legislature. Heard the new bill passed by government to create new private APMC? What could've been done 70 years ago done within 1 month. Who's talking about CAA? It's law now and it's in action. The whole migrant labor issue is about CAA. These so called migrants were payment earning non tax paying non income tax paying non PF paying consumers of a host state/country and they could also be misused by the host state/country for falsifying electoral results.
That's just one.
And then that this was about the birth of a New India.
Lastly,  every single entity that is anti Modi is using whatever means they can to besmirch the gov. So...this is one example.
They are all anti India
Rajdeep Sardesai, Barkha Dutt, Shobha De, Rana Ayub, The Entire Congress High Command, the legal team that works for them,  Kanhaiyya Kumar and his ilk from JNU, Javed Akhtar, Saba Naqvi, now the Shiv Sena, Sharad Pawar's NCP (add who else you think is anti India here. You can make out from their posture - anything that is pro India is bad for them, anything that is done by Modi is wrong)
If India must become a global power we must become a highly efficient nation. We need a strong leadership. A brainy leadership that we have not had before is the leadership that can lead us into A Global Respectability and Position for us. 
India must change. India must be re-born. After 70 years we are seeing a PM who can create a Truly Great Bharat. Yes he's tough. If you have a sportsman as a friend ask him how difficult it is to train to be #1. 
We need Modi more than Modi needs us.

If you believe this, please forward this to all the groups and your dear friend.
INDIA's TIME HAS COME.
India is always great with its ancient rich culture & values.

Jai Hind

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Friday, July 31, 2020

श्रीहनुमानचालीसा का अर्थ

कई लोगों की दिनचर्या श्रीहनुमानचालीसा पढ़ने से शुरू होती है, पर क्या आप जानते हैं कि श्रीहनुमानचालीसा में जो ४० चौपाइयां हैं, ये उसी क्रम में लिखी गई हैं जो एक आम आदमी की जिंदगी का क्रम होता है.

अगर आप सिर्फ श्रीहनुमानचालीसा पढ़ रहे हैं तो यह आपको भीतरी शक्ति आत्मबल तो दे रही है लेकिन अगर आप इसके अर्थ में छिपे जिंदगी के सूत्र समझ लें तो आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिल सकती हैं.

श्रीहनुमानचालीसा की शुरुआत से अंत तक सफलता के कई सूत्र हैं. आइए जानते हैं श्रीहनुमानचालीसा से आप अपने जीवन में क्या-क्या बदलाव ला सकते हैं….

हनुमान चालीसा की शुरुआत #गुरु से हुई है…

श्रीगुरु चरन सरोज रज,
निज मनु मुकुरु सुधारि।

अर्थ - अपने गुरु के चरणों की धूल से मैं अपने मन के दर्पण को साफ करता हूँ.

गुरु का महत्व चालीसा की पहले दोहे की पहली लाइन में लिखा गया है. जीवन में गुरु नहीं है तो आपको कोई आगे नहीं बढ़ा सकता. गुरु ही आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं.

इसलिए तुलसीदासजी ने लिखा है कि गुरु के चरणों की धूल से मन के दर्पण को साफ करता हूं. आज के दौर में गुरु हमारा मेंटर भी हो सकता है, बॉस भी, काउंसलर भी. माता-पिता को पहला गुरु ही कहा गया है. समझने वाली बात ये है कि गुरु यानी अपने से बड़ों का सम्मान करना जरूरी है. अगर तरक्की की राह पर आगे बढ़ना है तो विनम्रता के साथ बड़ों का सम्मान करें.

ड्रेसअप का रखें ख्याल…

चालीसा की चौपाई है

कंचन बरन बिराज सुबेसा,
कानन कुंडल कुंचित केसा।

अर्थ - आपके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है, सुवेष यानी अच्छे वस्त्र पहने हैं, कानों में कुंडल हैं और बाल संवरे हुए हैं।

आज के दौर में आपकी तरक्की इस बात पर भी बहुत निर्भर करती है कि आप रहते और दिखते कैसे हैं. फर्स्ट इंप्रेशन अच्छा होना चाहिए ना...

अगर आप बहुत गुणवान भी हैं लेकिन अच्छे से नहीं रहते हैं तो ये बात आपके करियर को प्रभावित कर सकती है. इसलिए, रहन-सहन और ड्रेसअप हमेशा अच्छा रखें.

श्रीहनुमानचालीसा में छिपे मैनेजमेंट के सूत्र...

सिर्फ डिग्री काम नहीं आती

बिद्यावान गुनी अति चातुर,
राम काज करिबे को आतुर।

अर्थ - आप विद्यावान हैं, गुणों की खान हैं, चतुर भी हैं. श्रीराम के काम करने के लिए सदैव आतुर रहते हैं.

आज के दौर में एक अच्छी डिग्री होना बहुत जरूरी है लेकिन चालीसा कहती है सिर्फ डिग्री होने से आप सफल नहीं होंगे. विद्या हासिल करने के साथ आपको अपने गुणों को भी बढ़ाना पड़ेगा, बुद्धि में चतुराई भी लानी होगी. हनुमान में तीनों गुण हैं, वे सूर्य के शिष्य हैं, गुणी भी हैं और चतुर भी.

अच्छा श्रोता (Listener) बनें

प्रभु चरित सुनिबे को रसिया,
राम लखन सीता मन बसिया।

अर्थ - आप राम चरित यानी राम की कथा सुनने में रसिक है, राम, लक्ष्मण और सीता तीनों ही आपके मन में वास करते हैं.

जो आपकी प्रायोरिटी है, जो आपका काम है, उसे लेकर सिर्फ बोलने में नहीं, सुनने में भी आपको रस आना चाहिए. अच्छा श्रोता होना बहुत जरूरी है। अगर आपके पास सुनने की कला नहीं है तो आप कभी अच्छे लीडर नहीं बन सकते.

कहां, कैसे व्यवहार करना है ये ज्ञान जरूरी है.

सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा।

अर्थ - आपने अशोक वाटिका में सीता को अपने छोटे रुप में दर्शन दिए और लंका दहन के समय आपने विराट स्वरुप धारण किया.

कब, कहां, किस परिस्थिति में खुद का व्यवहार कैसा रखना है, ये कला हनुमानजी से सीखी जा सकती है.

सीता से जब अशोक वाटिका में मिले तो उनके सामने छोटे वानर के आकार में मिले, वहीं जब लंका जलाई तो पर्वताकार रुप धर लिया. अक्सर लोग ये ही तय नहीं कर पाते हैं कि उन्हें कब किसके सामने कैसा दिखना है.

अच्छे सलाहकार बनें

तुम्हरो मंत्र बिभीसन माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना।

अर्थ - विभीषण ने आपकी सलाह मानी, वे लंका के राजा बने ये सारी दुनिया जानती है.

हनुमान सीता की खोज में लंका गए तो वहां विभीषण से मिले. विभीषण को राम भक्त के रुप में देख कर उन्हें राम से मिलने की सलाह दे दी. विभीषण ने भी उस सलाह को माना और रावण के मरने के बाद वे राम द्वारा लंका के राजा बनाए गए। किसको, कहां, क्या सलाह देनी चाहिए, इसकी समझ बहुत आवश्यक है. सही समय पर सही इंसान को दी गई सलाह सिर्फ उसका ही फायदा नहीं करती, आपको भी कहीं ना कहीं फायदा पहुंचाती है.

आत्मविश्वास की कमी ना हो

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही, जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।

अर्थ - राम नाम की अंगुठी अपने मुख में रखकर आपने समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई अचरज नहीं है.

अगर आपमें खुद पर और अपने परमात्मा पर पूरा भरोसा है तो आप कोई भी मुश्किल से मुश्किल टॉस्क को आसानी से पूरा कर सकते हैं. आज के युवाओं में एक कमी ये भी है कि उनका भरोसा बहुत जल्दी टूट जाता है. आत्मविश्वास की कमी भी बहुत है. प्रतिस्पर्धा के दौर में आत्मविश्वास की कमी होना खतरनाक है. अपनेआप पर पूरा भरोसा रखें....

#श्रीहरि की जय हो 🙏

#मेरेबजरंगी की जय हो 🙏

Tuesday, July 28, 2020

नागपूर चे ताजुद्दीनबाबा


श्री गणेशाय नमः !ओम नमः शिवाय !ओम ताजुद्दीनय नमः!

मी तीन दिवसान आधीच सद्गुरू संत श्री ताजुद्दीन बाबा यांच्या लिलामृताचे पठण समाप्त केले आणि दुसऱ्या दिवशीच मला तुमचं प्रश्न दिसलं त्यामुळे बाबांबद्दल काय सांगू नी काय नाही असं झाल …. त्यामुळे मी pending वर ठेवलं होतं , परंतु बाबांनीच मला आज्ञा केली आणि मी उत्तर द्यायला आले.

तर तुमच्या उत्तराकडे वळूया☺️।श्री संत ताजुद्दीन बाबांचा जन्म 26 जानेवारी 1861 ला पहाटे कामठी येथे झाला। त्यावेळी एकीकडे मंदिर च्या आरतीचा आवाज होता एकीकडे मस्जिद मधून अल्लाह ची अजाण सूरु होती आणि एकीकडे ख्रिश्चन च्या चर्च मधील घंटानाद☺️.लहानपणीच त्यांच्यावरील आईवडिलांचे छत्र हरवले म्हणून आजी आणि मामांनी त्यांचे संगोपन केले . काही काळाने घर चालावं बा म्हणून मामांनी त्यांना नोकरी करायचे सांगितले….उंचपुरे आणि धडाधिप्पाड असल्यामुळे त्यांना मिलिटरी मध्ये समाविष्ट करण्यात आले . एकदा कामठी च्या जंगलात अब्दुल्ला शाह कादरी यांनी बाबांना काही फळं दिली आणि सोबतच आपले दैवी तेज दिले. त्यानंतर बाबांची बदली सागर येथे झाली….तेथे त्यांना जंगलात एक संत दिसले । बाबा त्यांच्याकडे आकर्षित झाले , ते दिवसभर मिलिटरी चे काम करायचे आणि रात्र भर त्या संत जवळ ध्यान धारणा करायचे. इथूनच ते गंभीर आणि संतप्रवृत्ती ने वागू लागले. त्यांना सांसारिक जीवन नको होते…त्यांना आत्मबोध झाला आणि तडकफडकी मिलिटरी चा राजीनामा दिला. आजीने बाबांना परत नेले तिकडे बाबा नागड्या अवस्थेत भटकायचे , एकटेच ध्यानमग्न राहायचे ..लोक त्यांना पागल म्हणून गोटे मारायचे पण बाबा आपल्याच विश्वात असायचे . आता बाबांच्या लीला सुरू झाल्या . ते जेवन सुद्धा करीत नव्हते म्हणून आजी जेवण घेऊन आली , बाबा म्हणाले "हम तो खाते लाडू पेढे" आणि त्यांनी रस्त्यावरून गोटे उचलुन कचरकचर खाल्ले. लोकांना बाबांचे तेज आणि चमत्कार दिसू लागले आणि ते बाबांना देव मानायचे , बाबा जिकडे जातील तिकडे लोकांचा घोळका असायचा .. बाबा कधी आपल्या अंगावरील वस्त्र फेकयचे आणि भक्त तेच प्रसाद समजायचे . त्यांची लोकप्रियता वाढू लागली आणि लोकांचा गराडा पण … पण जे तिन्ही लोकांचे स्वामी आहे अशा संतास एकटेपण हवे होते… म्हणून एकदा ते इंग्रजांच्या छावणीमध्ये नागडेच गेले। महिलांनी बघुन आरडाओरड केली आणि त्यांना नागपूर येथील पागलखाण्यात नेण्यात आले. तिथे बाबांना एकांत मिळाला. पण दुसऱ्याच दिवशीच ज्या शिपायाने त्यांना पागलखाण्यात नेले त्यांना परत बाबा छावणीत दिसले म्हणून लगेच वरिष्ठांना कळविले आणि तो पागखाण्यात बघतो तर बाबा तिथेच होते ! पुन्हा परत येतो तर बाबा छावणीत ,हे बघून इंग्रजांने बाबांचे चरण पकडून क्षमा मागितली. त्यानंतर अनेक इंग्रज बाबांचे भक्त झालेत. पागलखाण्यात बाबांनी अगणित चमत्कार दाखविले, एका मुस्लिमाला हजला गेला असताना काब्याला दर्शन दिले आणि नागपूर येथे येण्यास सांगितले तर त्यांना आश्चर्य झाला कारण पागलखाण्यात बंदिस्त असतानाही काब्यात कसे दर्शन दिले। एका हिंदू भक्ताला श्रावण सोमवारी बाबांनी भगवान शंकर च्या रुपात दर्शन दिले. एकदा त्यांच्यात गळ्यामध्ये नाग दिसला , भक्त घाबरलेत तर तो नाग आपोआप अदृश्य झाला . मग बाबा नागपूर येथील राजा शिवछत्रपती चे वंशज क्षत्रिय कुलावंत श्री राघोजी महाराज यांच्या स्वप्नात दृष्टांत दिले की आता येणे बा तुझे घरी . परंतु राघोजी राजांकडे एक संत मुक्कामास आल्यामुळे बाबा म्हणाले "एक म्यांन मे दो तलवार नही रे " याचा अर्थ राघोजीना नंतर कळला. दरम्यान बाबा नागपूर जवळच वाकी येथे वास्तव्यास गेले. तेथे बाबांनी अनंत लीला दाखविल्या . येथे बाबानी अनेकांना न्याय दिला म्हनून हायकोर्ट आहे, बाबांचा मदरसा आहे ,बाबांचा दवाखाना आहे जिथे साधी माती देऊन बाबांनी अनेकांचे दुर्धर रोग आजार बरे केले ,आजही लोक इथे जातात, बाबांचा डेरा आहे जिथे चिंचेच्या झाडाखाली बाबा ध्यानमग्न असायचे , मिठाणीम आहे…. एक कडुनिंबाचा झाड ज्याची अरधी पाने गोड आनि अर्धी कडु आहे म्हणून मिठाणीम . बाबानी दोन मैत्रिणींना लाडू दिले ज्यांना दहा वर्षापासुन मुलबाळ नव्हते. एकीनी मनोभावे प्रसाद समझुन खाल्ले तर एकींनि विचार केला की हा तर मुस्लिम संत आहे याचं उष्ट मी कस खाऊ आणि रेतीत टाकून दिला. एकीला पुत्र झाला ती दर्शनाला गेली , दुसरी म्हणाली बाबा , "कुठे माझे बाळ".. आणि रडू लागली ,बाबा करुणानिधान ,त्यांना पाझर फुटला आणि म्हणाले" रेत मे डाला था निकाल ले वहा से"त्यानंतर 9 महिणयांनी तिला पुत्ररत्न प्राप्त झाला. दुसऱ्या देशातून मुस्लीम आले बाबांची परीक्षा घेण्या.. तेव्हा बाबांनि बोटाच्या इशाऱ्यावर आकाशातील सूर्याचे दोन तुकडे केले आणि हा प्रसंग उपस्थित सर्व भाविकानि बघितला. एका लनगड्याला कमरेवर लाथ मारली आणि तो चालू लागला . बाबांची प्रिय गायिका जी रोज कव्वाली म्हणायची तिला मेल्यानंतर परत जिवंत केले. शेरु नामक कुत्र्याला जिवंत केले जो भाविकांना बाबनपर्यंत घेऊन जायचा. रस्त्याने जात असताना एका मूलाला हार फेकून दिला त्याने तो क्रिकेट च्या बॅट ला लावला आणि कैंकैया नायडु प्रसिध्द झाला. तसेच हिदायतुलला च्या घरी काही फकीरांना जाण्यास सांगितले आणि हिदायतुलला च्या वडीलास सांगितले हाथ मे कलम दो छोटे बेटे को आणि तो पुढे जाऊन भारताचा सर्वोच्च न्यायालयाचा न्यायमूर्ती झाला तसेच दोन वेळा उपराष्ट्रपती आणि एकदा हंगामी राष्ट्रपती झाले. वर्षानुवर्षे रेल्वे स्थानकावर भीक मागनाऱ्याला रातोरात चालते केले ,त्यांनी सांगितले बाबांनि रात्री स्वप्नात दर्शन दिले… हा वृत्त "टाईम्स"च्या वृत्तपत्रात झळकला.कॅन्सर च्या रुग्णाला वरण भात देउन बरे केले . एक आई आपल्या बाळाला घेऊन दर्शनाला गेली ,बाबांची नजर लगेच बाळावर गेली आणि आपल्या तोंडातील पानाचा विडा बाळाच्या मुखात टाकला आणि म्हणाले"हो जी अम्मा तेरा ये बच्चा तो अल्ला का तोता है" , हे बाळ म्हणजेच विदर्भाचे महान गायक वसंतराव देशपांडे होय. तसेच एकदा बाबा महाराज बाग कडे फिरत असताना नागपूर अधिवेशनासाठी आलेले एक महान नेते बाबांची किर्ती ऐकून दर्शनासाठी गाडीतून उतरले…बाबांनी त्यास म्हटले " हाओ जी चलाओ खूप चक्कर" ते नेते म्हणजे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आणि पुढे जाऊन यांनी चरखा च्या बळावर भारताला स्वातंत्र्य मिळवून दिले. एक भक्त बाबांच्या सेवेत असताना काशी जायची परवानगी मागत होता, बाबा नाही म्हणाले तरीही तो न सांगता गेला. तिथे त्याला शंकर भगवान च्या पिंडीवर बाबा ध्यानमग्न बसलेले दिसले , असे दिसताच तो वाकीला परत आला तर बाबा क्रोधीत होऊन गुप्तांग हातात पकडून म्हणाले " क्यु रे देख लिया काशी"…. असा हा संत तिन्ही जगाचा स्वामी योगिराणा ताजुद्दीन बाबा. मुस्लीम धर्मात जन्म घेतला पण आयुष्य भर हिंदू च्या घरी राहले आणि ऐक्याचा संदेश दिला. मुंबई मध्ये हिंदु मुस्लिम दंगे झाले तेव्हा मुस्लिम लोक बाबांच्या चरणी आले आणि म्हणाले हिंदू लोक हमे मर देणगे, यावर बाबा म्हणाले सच्चे मुस्लिम को कोई नही मार सकता… जो मर रहे है वो तो पापी है , अधर्मी है ऐसे लोगो का कोई धर्म नाही… . समाधी नंतर सुद्धा बाबांनी अनेक लीला दाखविलया. असे हे थोर सूफी संत ताजुद्दीन बाबा , यांच्या दर्शनाला नित्य जगभरातून हिंदू आणि मुस्लिम येत असतात आणि तसेच बाबांनी एक ख्रिश्चन भक्ताला येशू ख्रिस्त च्या प्रतिमेमध्ये आपले रूप दाखवले तसेच जैन भक्ताला सुध्दा दर्शन दिले ,नागपूरातील ताजबाग हे सर्व धर्मीयांसाठी श्रद्धेचे स्थान आहे , बाबांना नागपूरचा राजा असे समबोधले जाते तसेच दरवर्षी त्यांचा शाही संदल निघतो आणि हजारो सर्वधर्मीय भाविक त्यांमध्ये असतात… अशा संतास मी विनम्रपणे नतमस्तक होऊन वंदन करते। ओम ताजुद्दीनय नमः।


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Saturday, July 25, 2020

क्या हैआरती का महत्व औरआरती कितने प्रकार की होती है?????

क्या हैआरती का महत्व औरआरती कितने प्रकार की होती है?????

 आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है, विशेष रूप से प्रकाशित करना। यानी कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है। 
 
स्कंद पुराण में भगवान की आरती के संबंध में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता हो पूजा की विधि भी नहीं जानता हो। लेकिन भगवान की आरती की जा रही हो और उस पूूजन कार्य में श्रद्धा के साथ शामिल होकर आरती करें, तो भगवान उसकी पूजा को पूरी तरह से स्वीकार कर लेते हैं।
 
*1 - आरती दीपक से क्यों????

 रुई के साथ घी की बाती जलाई जाती है। घी समृद्धि प्रदाता है। घी रुखापन दूर कर स्निग्धता प्रदान करता है। भगवान को अर्पित किए गए घी के दीपक का मतलब है कि जितनी स्निग्धता इस घी में है। उतनी ही स्निग्धता से हमारे जीवन के सभी अच्छे कार्य बनते चले जाएं। कभी किसी प्रकार की रुकावटों का सामना न करना पड़े।
 
*2 - आरती में शंख ध्वनि और घंटा ध्वनि क्यों ????

 आरती में बजने वाले शंख और घंटी के स्वर के साथ जिस किसी देवता को ध्यान करके गायन किया जाता है। उससे मन एक जगह केन्द्रित होता है, जिससे मन में चल रहे विचारों की उथल-पुथल कम होती जाती है। शरीर का रोम-रोम पुलकित हो उठता है, जिससे शरीर और ऊर्जावान बनता है। 
 
*3 - आरती कर्पूर से क्यों ?????
 कर्पूर की महक तेजी से वायुमंडल में फैलती है। ब्रह्मांड में मौजूद सकारात्मक शक्तियों ( दैवीय शक्तियां ) को यह आकर्षित करती है। आरती वह माध्यम है जिसके द्वारा देवीय शक्ति को पूजन स्थल तक पहुंचने का मार्ग मिल जाता है।
 
*4 : -  आरती करते हुए भक्त के मन में ऐसी भावना होनी चाहिए कि मानो वह पंच-प्राणों ( पूरे मन के साथ ) की सहायता से ईश्वर की आरती उतार रहा हो। घी की ज्योति को आत्मा की ज्योति का प्रतीक मानना चाहिए। यदि भक्त अंतर्मन से ईश्वर को पुकारते हैं तो यह पंचारती कहलाती है। 
 
*5 : -  आरती दिन में एक से पांच बार की जा सकती है। घरों में आरती दो बार की जाती है। प्रातःकालीन आरती और संध्याकालीन आरती। 
 
*6 : -  दीपभक्ति विज्ञान के अनुसार आरती से पहले भगवान को नमस्कार करते हुए तीन बार फूल अर्पित करना चाहिए।
 
*7 : -  उसके बाद एक दीपक में शुद्ध घी लेकर उसमें विषम संख्या में यानी कि 1, 3, 5 या 7 बत्तियां जलाकर आरती करनी चाहिए। सामान्य तौर पर पांच बत्तियों से आरती की जाती है,जिसे पंच प्रदीप भी कहते हैं। इसके बाद कर्पूर से आरती की जाती है। कर्पूर का धुंआ वायुमंडल में जाकर मिलता है। यहां धुआं हमारे पूजन कार्य को ब्रंह्माडकीय शक्ति तक पहुंचाने  का कार्य करता है।
 
*8 : -  किसी विशेष पूजन में आरती पांच चीजों से की जा सकती है। पहली धूप से, दूसरी दीप से, तीसरी धुले हुए वस्त्र से, कर्पूर से ,पांचवी जल से।
 
*कैसे सजाना चाहिए आरती का थाल आरती करने की पूरी विधि के बारे में...*

आरती के थाल में एक जल से भरा लोटा, अर्पित किए जाने वाले फूल, कुमकुम, चावल, दीपक, धूप, कर्पूर, धुला हुआ वस्त्र, घंटी, आरती संग्रह की किताब रखी जाना चाहिए। थाल में कुमकुम से स्वस्तिक की आकृति बना लें। थाल पीतल या तांबे का लिया जाना चाहिए।
 
*आरती करने की विधि*

*1 : -  भगवान के सामने आरती इस प्रकार से घुमाते हुए करना चाहिए कि ऊँ जैसी आकृति बने। 

*2 : -  अलग-अलग देवी - देवताओं के सामने दीपक को घुमाने की संख्या भी अलग है, जो इस प्रकार है।

भगवान शिव के सामने तीन या पांच बार घुमाएं।

भगवान गणेश के सामने चार बार घुमाएं। 

भगवान विष्णु के सामने बारह बार घुमाएं। 

भगवान रूद्र के सामने चौदह बार घुमाएं।

भगवान सूर्य के सामने सात बार घुमाएं।

भगवती दुर्गा जी के सामने नौ बार घुमाएं। 

अन्य देवताओं के सामने सात बार घुमाएं। 

यदि दीपक को घुमाने की विधि को लेकर कोई उलझन हो रही हो तो आगे दी गई विधि से किसी भी देवी या देवता की आरती की जा सकती है।
 
*3 : -  आरती अपनी बांई ओर से शुरू करके दाईं ओर ले जाना चाहिए। इस क्रम को सात बार किया जाना चाहिए। सबसे पहले भगवान की मूर्ति के चरणों में चार बार, नाभि देश में दो बार और मुखमंडल में एक बार घुमाना चाहिए। इसके बाद देवमूर्ति के सामने आरती को गोलाकार सात बार घुमाना चाहिए।
 
*4 : -  पद्म पुराण में आरती के लिए कहा गया है कि कुंकुम, अगर, कपूर, घी और चन्दन की सात या पांच बत्तियां बनाकर अथवा रुई और घी की बत्तियां बनाकर शंख, घंटा आदि बजाते हुए आरती करनी चाहिए।
 
*5 : - भगवान की आरती हो जाने के बाद थाल के चारों ओर जल घुमाया जाना चाहिए, जिससे आरती शांत की जाती है।
 
*6 : -  भगवान की आरती सम्पन्न हो जाने के बाद भक्तों को आरती दी जाती है। आरती अपने दाईं  ओर से दी जानी चाहिए।
 
*7 : -  सभी भक्त आरती लेते हैं। आरती लेते समय भक्त अपने दोनों हाथों को नीचे को उलटा कर जोड़ते हैं। आरती पर से घुमा कर अपने माथे पर लगाते हैं। जिसके पीछे मान्यता है कि ईश्वरीय शक्ति उस ज्योत में समाई रहती हैं। जिस शक्ति का भाग भक्त माथे पर लेते हैं। एक और मान्यता के अनुसार इससे ईश्वर की नजर उतारी जाती है। जिसका असली कारण भगवान के प्रति अपने प्रेम व भक्ति को जताना होता है।

*पूजा के बाद क्यों जरूरी है आरती ?*

घर हो या मंदिर भगवान की पूजा के बाद घड़ी, घंटा और शंख ध्वनि के साथ आरती की जाती है। बिना आरती के कोई भी पूजा अपूर्ण मानी जाती है। इसलिए पूजा शुरू करने से पहले लोग आरती की थाल सजाकर बैठते हैं। पूजा में आरती का इतना महत्व क्यों हैं इसका उत्तर स्कंद पुराण में मिलता है। इस पुराण में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता, पूजा की विधि नहीं जानता लेकिन आरती कर लेता है तो भगवान उसकी पूजा को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लेते हैं।

आरती का धार्मिक महत्व होने के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है। याद कीजिए आरती की थाल में कौन कौन सी वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है। आपके जेहन में रुई, घी, कपूर, फूल, चंदन जरूर आ गया होगा। रुई शुद्घ कपास होता है इसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं होती है। इसी प्रकार घी भी दूध का मूल तत्व होता है। कपूर और चंदन भी शुद्घ और सात्विक पदार्थ है।

जब रुई के साथ घी और कपूर की बाती जलाई जाती है तो एक अद्भुत सुगंध वातावरण में फैल जाती है। इससे आस-पास के वातावरण में मौजूद नकारत्मक उर्जा भाग जाती है और सकारात्मक उर्जा का संचार होने लगता है।

आरती में बजने वाले शंख और घड़ी-घंटी के स्वर के साथ जिस किसी देवता को ध्यान करके गायन किया जाता है उसके प्रति मन केन्द्रित होता है जिससे मन में चल रहे द्वंद का अंत होता है। हमारे शरीर में सोई आत्मा जागृत होती है जिससे मन और शरीर उर्जावान हो उठता है। और महसूस होता है कि ईश्वर की कृपा मिल रही है।

                 - डॉ0 विजय शंकर मिश्र

Thursday, July 23, 2020

भगवान शिव को श्रावण माह में दूध चढ़ाने की परंपरा

भगवान शिव को श्रावण माह में दूध चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है.
वैसे 'रुद्राभिषेक' और अन्य अवसरों पर भी महादेव को दूध चढ़ाया जाता है.
कुछ लोग एेसे हैं जिनको पता नहीं शिवजी को दूध क्यों चढ़ाया जाता है!
कभी शास्त्रों का अध्ययन कीए हीं नहीं.
लेकिन आमिर खान कहता है दूध चढ़ाना गलत है तो मान गए.
भारत के रिषि कहते हैं दूध चढ़ाओ इनको विश्वास नहीं,
आमिर खान कहता है मत चढ़ाओ,पाखंड है.
तो मान गए पाखंड है.
एेसे लोग आमिर खान के फैन हैं और वो तर्क देता हैं कि शिवजी को दूध चढ़ाकर नष्ट करने से अच्छा है कि वो दूध किसी भूखे को पिलाया जाए.
आमिर खान या एेसे दुस्साहसी बॉलीवुड के कितने लोगों ने भूखे को दूध पिलाकर दूध का सदुपयोग किया ये तो मुझे पता नहीं.
यहीं आमिर खान तीन-तलाक और बुर्का की प्रथा पर चुप क्यों हैं ये समस्त भारत जानता है.
और सीधी भाषा में कहूं तो ये समझदारी कभी बकरीद पर भी दिखला देते आमिर खान-
"बकरीद पर गाय-बकरों को मारकर उनका खून बहाने से अच्छा है कि ये गाय-बकरे किसी निर्धन किसान को दान कर दें ताकि पशुपालन से किसान को खेती में थोड़ी मदद मिल जाए."
हम बॉलीवुड के असभ्य कलाकारों की बातों पर बहुत शीघ्र हीं विश्वास कर लेते हैं.
ये लोग यदि इतने हीं ज्ञानी होते तो नंगे-अधनंगे होकर फिल्मों में नाचकर पैसे कमाने की आवश्यकता क्या थी!
इनको छोड़िए,
हम आज बात करेंगे शिवजी को दूध चढ़ाने की पौराणिक और वैज्ञानिक कारण की.
पौराणिक कारण-
सृष्टि की रचना होने के बाद जब देवताओं और असुरों में निरंतर भयंकर युद्ध होने लगे तब असुरों की विशालकाय सेना और बाहुबल देवताओं पर भारी पड़ने लगा.
देवताओं को अत्यधिक होनेवाली हानि से चिंतित देवराज इंद्र समस्त देवताओं के साथ ब्रह्माजी के पास पहुंचे और वृतांत सुनाया.
ब्रह्माजी बोले आपलोग जगतपालक श्रीहरि विष्णु के पास जाईए,वहीं आपकी चिंता दूर करेंगे.
सभी देव विष्णुजी के पास पहुंचे और अपना वृतांत पुनः सुनाया.
विष्णुजी ने समुद्र मंथन और उससे प्राप्त होने वाले अमृत तत्व का रहस्य समझाया.
समुद्र मंथन हुआ तो सर्वप्रथम वो "हलाहल विष" प्राप्त हुआ.
क्या करें इस विष का पृथ्वी पर पड़े तो समस्त पृथ्वी नष्ट होगी,
आकाश में फेकें तो अंतरिक्ष नष्ट और जल में फेकने पर जल संसाधन हीं हलाहल बन जाएगा.
महादेव शिव ने उस हलाहल को पीकर अपने कंठ में स्थिर कर लिया और विष के कारण उनका कंठ नीले रंग का हो गया.
इसीलिए महादेव को 'नीलकंठ' नाम भी मिला.
विष की उष्णता को नियंत्रित रखने के लिए शीतलता की आवश्यकता होती है और गाय के दूध से शीतल क्या हो सकता है?
जिन्होने विष को कंठ में धारण कर लिया हो उनको विष की उष्णता क्या हानि पहुंचा सकती? असंभव,बिल्कुल नहीं.
लेकिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हम उनके प्रति अपनी निष्ठा और श्रद्धा को बताने के लिए दूध का अभिषेक करते हैं.
शिवजी को दूध की आवश्यकता नहीं,हमे शिव की आवश्यकता है और इसीलिए अभिषेक होता है.
वैज्ञानिक कारण-
यजुर्वेद,आधुनिक आयुर्वेद और वैज्ञानिकों के अनुसार मानव शरीर तीन तत्वों की अधिकता से रोगी हो जाता है-वात,पित्त और कफ.
पशुओं द्वारा खाई जाने वाली घासों में वात तत्व पाया जाता है जो श्रावण माह में अधिकतम होता है.
इसीलिए आयुर्वेद श्रावण माह में दूध के सेवन को वर्जित बतलाता है.
भारत के महर्षियों नें वैज्ञनिक शोधों और साक्ष्यों के उपरांत शिवजी का दूध से अभिषेक करने की विशेषतः श्रवाण माह में परंपरा बनाई.
भूखे को दूध भी पिलाओ,खाना भी खिलाओ ये अलग मुद्दा है.
शिवजी का अभिषेक अलग मुद्दा है.
और आज ये निरक्षर निर्बुद्धि लोग प्रश्न उठाते हैं?
आप यदि इस रहस्य को समझ गए तो निश्चित रुप से शेयर कीजिएगा.

                  - डॉ0 विजय शंकर मिश्र

. *🌹 श्री कृष्ण स्तुति 🌹*

.         *🌹 श्री कृष्ण स्तुति 🌹*

श्रीनिवासा गोविंदा, श्री वेंकटेशा गोविंदा,
भक्त वत्सल गोविंदा, भागवता प्रिय गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

नित्य निर्मल गोविंदा, नीलमेघ श्याम गोविंदा,
पुराण पुरुषा गोविंदा, पुंडरीकाक्ष गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

नंद नंदना गोविंदा, नवनीत चोरा गोविंदा!
पशुपालक श्री गोविंदा, पाप विमोचन गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

दुष्ट संहार गोविंदा, दुरित निवारण गोविंदा!
शिष्ट परिपालक गोविंदा, कष्ट निवारण गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

वज्र मकुटधर गोविंदा, वराह मूर्ती गोविंदा,
गोपीजन लोल गोविंदा, गोवर्धनोद्धार गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

दशरध नंदन गोविंदा, दशमुख मर्धन गोविंदा,
पक्षि वाहना गोविंदा, पांडव प्रिय गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

मत्स्य कूर्म गोविंदा, मधु सूधना हरि गोविंदा!
वराह नृसिंह गोविंदा, वामन भृगुराम गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

बलरामानुज गोविंदा, बौद्ध कल्किधर गोविंदा!
वेणु गान प्रिय गोविंदा, वेंकट रमणा गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

सीता नायक गोविंदा, श्रितपरिपालक गोविंदा,
दरिद्रजन पोषक गोविंदा, धर्म संस्थापक गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

अनाथ रक्षक गोविंदा, आपध्भांदव गोविंदा,
शरणागतवत्सल गोविंदा, करुणा सागर गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

कमल दलाक्षा गोविंदा, कामित फलदात गोविंदा!
पाप विनाशक गोविंदा, पाहि मुरारे गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

श्रीमुद्रांकित गोविंदा, श्रीवत्सांकित गोविंदा!
धरणी नायक गोविंदा, दिनकर तेजा गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

पद्मावती प्रिय गोविंदा, प्रसन्न मूर्ते गोविंदा,
अभय हस्त गोविंदा, अक्षय वरदा गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

शंख चक्रधर गोविंदा, सारंग गदाधर गोविंदा,
विराज तीर्थ गोविंदा, विरोधि मर्धन गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

सालग्राम हर गोविंदा, सहस्र नाम गोविंदा!
लक्ष्मी वल्लभ गोविंदा, लक्ष्मणाग्रज गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

कस्तूरि तिलक गोविंदा, कांचनांबरधर गोविंदा!
गरुड वाहना गोविंदा, गजराज रक्षक गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

वानर सेवित गोविंदा, वारथि बंधन गोविंदा,
एडु कोंडल वाडा गोविंदा, एकत्व रूपा गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

रामकृष्णा गोविंदा, रघुकुल नंदन गोविंदा,
प्रत्यक्ष देव गोविंदा, परम दयाकर गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

वज्र मुकुटदर गोविंदा, वैजयंति माल गोविंदा!
वड्डी कासुल वाडा गोविंदा, वासुदेव तनया गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

बिल्वपत्रार्चित गोविंदा, भिक्षुक संस्तुत गोविंदा!
स्त्री पुं रूपा गोविंदा, शिवकेशव मूर्ति गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

ब्रह्मानंद रूपा गोविंदा, भक्त तारका गोविंदा,
नित्य कल्याण गोविंदा, नीरज नाभा गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

हति राम प्रिय गोविंदा, हरि सर्वोत्तम गोविंदा,
जनार्धन मूर्ति गोविंदा, जगत् साक्षि रूपा गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

अभिषेक प्रिय गोविंदा, अभन्निरासाद गोविंदा!
नित्य शुभात गोविंदा, निखिल लोकेशा गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा!

आनंद रूपा गोविंदा, अध्यंत रहित गोविंदा,
इहपर दायक गोविंदा, इपराज रक्षक गोविंदा!
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

पद्म दलक्ष गोविंदा, पद्मनाभा गोविंदा,
तिरुमल निवासा गोविंदा, तुलसी वनमाल गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा,

शेषशायी गोविंदा, शेषाद्रिनीलय गोविंदा!
श्री श्रीनिवासा गोविंदा, श्री वेंकटेशा गोविंदा,
गोविंदा हरि गोविंदा, गोकुल नंदन गोविंदा!

   🌸 *श्री राधे कृष्ण:शरणं ममः* 🌸

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