Thursday, December 1, 2016

लहसुन के फायदे

"लहसुन" को तकिये के नीचे रखने से होता है ये कमाल, जानिए...
Rochak News 1 Dec. 2016 18:20

नई दिल्ली।जरा सी बीमार पड़ने पर भी कई लोग डॉक्टर के पास जाते हैं। कुछ बीमारियों के लिए तो लंबा इलाज़ भी चलता है और बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं। लेकिन पुराने समय में ऐसा नहीं होता था।
लोग घरेलू उपचारों से ही सबकुछ ठीक कर लेते थे। आज भी हम लोग दादी-नानी के नुस्खों के बारे में सुनते तो हैं पर हमें इनकी सही-सही जानकारी नहीं होती है। हमारे घर की रसोई में ही कई चमत्कारिक मसाले उपलब्ध होते हैं जिनके लाभ के बारे में हम जानते ही नही हैं। सर्दियों का मौसम आ गया है। इसके साथ कई बीमारियां भी दस्तक दें रही है। इसलिए हम आपको एक ऐसे घरेलू मसाले के बारे में बताएंगे जो सर्दी में आपके बहुत काम आएगा। आइये देखते हैं क्या है इस मसाले की खासियत।
हम भारतीय रसोइयों में सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाले मसाले लहसुन की बात कर रहे हैं। लहसुन का हर हिस्सा स्वास्थ्य के लिए रामबाण की तरह होता है। इसी वजह से इसे बहुत महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी और औषधि भी माना जाता है।

सामान्य बीमारियों में है असरकारक
लहसुन कई सामान्य बीमारियों जैसे कि फ्लू और सर्दी में बहुत उपयोगी होता है। बच्चों को सर्दी के दौरान लहसुन की माला भी पहनाई जाती है। इसे कई अन्य घरेलू खाद्य सामग्री जैसे कि शहद आदि के साथ मिलाकर सर्दी के दौरान इसका सेवन करते हैं।
खाली पेट करे कमाल
लहसुन को खाली पेट खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। इसे खाली पेट खाने से पाचन तंत्र ठीक रहता है और भूख भी बढ़ती है। साथ ही जिन्हें ट्यूबरक्युलोसिस (TB) की समस्या हो उन्हें भी खाली पेट लहसुन खाने से बहुत लाभ मिलता है। इससे एसिडिटी और डायरिया से भी राहत मिलती है।

दिल को संभालें
लहसुन के प्रयोग से उक्त रक्तचाप की समस्या से भी समाधान मिलता है। इसमें मौजूद एलीसिन तत्व रक्तचाप को कम करता है। साथ ही अन्य हृदय संबंधी समस्याओं का समाधान भी करता है। यह लीवर और ब्लैडर के निर्बाद्ध संचालन में भी सहायता करता है।
जिएंगे ज्यादा
लहसुन में चमत्कारिक एंटीबायोटिक्स होते हैं जिनसे आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। साथ ही यह ह्रदय और लीवर जैसे अन्य महत्वपूर्ण अंगों को भी स्वास्थ्य रखता है। जिससे आपके लंबे समय तक जीने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

बचाता है अल्ज़ाइमर से
दांतों को भी चमकाए
लहसुन खाने से आपके दांतों में लगने वाले कीड़ों से आपको निजात मिलेगी और सड़न की दिक्कत भी खत्म होगी।

दमा में भी फायदा
अगर रोज अपने खाने में लहसुन का इस्तेमाल करेंगे तो दमे की बीमारी से आपको निजात मिलेगी।
तकिए के नीचे रखकर सोएं
अगर आपको रात में नींद अच्छी नहीं आती, तो आप लहसुन को तकिए के नीचे रख सकते हैं। इससे आपको बुरे सपने भी नहीं आएंगे और आप हमेशा positive ही रहेंगे।

Wednesday, November 30, 2016

कैंसर वर उपाय

🍋🍋🍋 लिंबाचे 🍋🍋🍋🙏

🌹अतिथंड केलेल्या लिंबाचे आश्चर्यकारक परिणाम🌹

👉स्वच्छ धुतलेले लिंबु फ्रिजच्या फ्रिजर मध्ये ठेवा..
ते लिंबु पुर्णपणे थंड आणि बर्फासारखे कडल झाल्यावर, साधारणत: 8 ते 10 तासानी, एक किसनी घेउन ते सर्व लिंबु साली सकट किसुन घ्या.. नंतर तुम्ही जे काही खाल त्यावर ते किसलेले लिंबु टाकुन खा..

👉भाज्यांवर, सॅलड वर, आईसक्रीम, सुप, डाळी,  नुडल्स, स्पेगेटी, पास्ता, पिझ्झा, साॅस, भात, सुशी, मासे, मट्ण, या आणि अश्या अनेक पदार्थांवर टाकुन खाता येईन..

🌹सर्व अन्नाला एक अनपेक्षीत अशी छान चव येईल..
सगळ्यात महत्वाचे, आपल्याला फक्त लिंबाच्या रसातील व्हिटॅमिन सी चे गुणधर्म फक्त माहिती आहेत.. त्यापेक्षा अधिक गुणधर्म माहिती नाहीत..

👉साली सह संपुर्ण गोठलेले लिंबु कोणताही भाग वाया न जाता वापरल्यास एक वेगळी चव तर मिळतेच, परंतु त्याचे अजुन काय फायदे आहेत??

🌹लिंबाच्या सालीत लिंबाच्या रसापेक्षा 5 ते 10 पट जास्त व्हिटॅमिन सी असते.. आणि हाच भाग आपण वाया घालवतो..

🌹लिंबाची साल आरोग्य वर्धक आहे कारण त्यामुळे शरिरातील सर्व विषद्रव्ये शरिराबाहेर काढुन टाकायला मदत होते..

👉लिंबाच्या सालीचा एक आश्चर्य कारक फायदा म्हणजे त्याच्यामध्ये असलेली एक चमत्कारीक अशी क्षमता की ज्यामुळे शरिरातील सर्व कॅन्सरच्या पेशींचा नाश होतो.. केमोथेरपी पेक्षा ही लिंबाची साल 10,000 पट जास्त प्रभावी आहे..

🌹मग आपल्याला हे सर्व का माहिती नाही??

👉कारण आज जगात अश्या प्रयोगशाळा आहेत की ज्या त्याचे कृत्रिम पद्धतीने निर्मीती करण्यात गुंतल्या आहेत कारण त्यापासुन त्याना भरपुर नफा मिळतो..

👉तुम्ही आता गरजूना सांगु शकता की कॅन्सर सारखा असाध्य आजार दुर ठेवण्यासाठी किंवा झाल्यास बरा करण्यासाठी लिंबाचा रस आणि साल किती फायदेशीर आहे.. त्याची चव पण खुप छान असते आणि केमोथेरपी प्रमाणे त्याचे भयानक साईड इफेक्ट पण नाही आहेत..

👉विचार करा, हा अतिशय साधा, सोपा, परंतु अत्यंत प्रभावी असा उपाय माहिती नसल्याने आज पर्यंत किती लोकाना आपले आयुष्य गमवावे लागले असेल आणि इथुन पुढे आपण किती लोकांचे प्राण वाचवू शकतो???

👉लिंबाच्या वनस्पतीत सर्व प्रकारचे कॅन्सर बरे करण्याची एक चमत्कारीक अशी क्षमता आहे.. याचा वापर बॅक्टेरीअल इन्फेक्षन आणि फंगस वर सुद्धा होउ शकतो.. शरिराअंतर्गत परोपजीवी आणि विषाणु वरही प्रभावी आहे..

👉लिंबाचा रस आणि विशेषत: साल रक्तदाब आणि मानसिक दबाव नियमीत करते.. मानसिक ताण आणि मज्जासंस्थेचे आजार नियंत्रीत करते..
या माहितीचा स्त्रोत अतिशय थक्क करणारा आहे :

👉जगातल्या सगळ्यात मोठ्या औषध निर्मिती कंपनी पैकी एक असलेल्या कंपनीने हे प्रसिद्ध केले आहे.. ते म्हणतात की 1970 पासुन 20 पेक्षा जास्त प्रयोगशाळानमध्ये संशोधन केल्यानंतर असे निदर्शनात आले आहे की, लिंबाची साल 12 पेक्षा जास्त कॅन्सरच्या घातक पेशी नष्ट करतात..

👉लिंबाच्या झाडाचे औषधी गुणधर्म कॅन्सरवरील ड्रामायसीन या केमेथेरपीसाठी सामान्यपणे वापरल्या जाणा-या औषधापेक्षा 10,000 पट जास्त प्रभावी ठरले आहे.. लिंबाची साल कॅन्सरच्या पेशींची वाढ मंदावते..

👉आणि अधिक आश्चर्याची गोष्ट म्हणजे या लिंबाच्या औषधामुळेच फक्त कॅन्सरच्याच पेशींचा नाश होतो, त्याचा निरोगी पेशिंवर कोणताही विपरीत परिणाम होत नाही..

म्हणुन चांगल्या पिकलेल्या लिंबाना स्वच्छ धुवा, त्याना गोठवा आणि किसनी वर किसुन रोजच्या आहारात वापरा..
तुमचे संपुर्ण शरिर त्याबद्दल तुम्हाला धन्यवाद देईल..

       -डॉ. विकास बाबा आमटे
                 आनंदवन
🍋🍋🍋🍋🍋🍋🍋🍋🍋 Please forward to as many as possible

Wednesday, November 23, 2016

लकवा

http://sharechat.co/post/A9P7m
लकवा   (पॅरालिसीस)
       नागरमुन्नोळी
🙏🙏🍇🍏🍎🍓🍈🍒🍊🍐🍍🍅☕🍶🍴🍽
मिरज पासुन ७० कि.मी चिक्कोडी पासुन १० किमी.

" नागरमुनोळ्ळी  ता.चिक्कोडी जि.बेळगाव."

चिक्कोडी  पासून
१० कि.मी.नागरमुन्नोळी म्हणून गाव आहे,
त्या गावा मध्ये
श्री डाॅ.पांडुरंग कुंभार म्हणून आयर्वेदिक डाॅक्टरआहेत,
ते फक्त लकव्या/ पॅरालिसीस वरच औषध देतात,
लकवा कितीही पण जूना व गंभीर असू द्या, तो १००% बरा होणारच.  पेशंटचे केस पेपर्सचे
फक्त ५०/- रुपये घेतले जातात व ईजेक्शनचे २०० रूपये. महिन्यात फक्त ५ वेळा विझीट द्यावी लागते पन पेशंट १००% कव्हरच होतो मित्राच्या वडिलांचा अनुभव आहे मित्राने आत्ता पर्यत ३०-३५ पेशंट पाठवले जे गेले  अॅब्युलन्स मध्ये पण आले चालत...    ते सर्व आता चालतात फिरतात... नाॅरमल आहेत .
आपल्याकडून जर कोणाचा जीव वाचत असेल,तर या पेक्षा दुसरी कुठली सेवा असेल.
धन्यवाद.

कसे जाणार?
मार्ग-: १
मिरज- चिक्कोडी- नागरमुन्नोळी

कोल्हापुर -कागल- चिक्कोडी नागरमुन्नोळी

टीप:- चिक्कोडी वरून गोकाक जानारी बस पकडणे

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Tuesday, November 22, 2016

कणा मराठी कविता

ओळखलत का सर मला?’ पावसात आला कोणी,
कपडे होते कर्दमलेले, केसांवरती पाणी.

क्षणभर बसला नंतर हसला बोलला वरती पाहून,
‘गंगामाई पाहुणी आली, गेली घरट्यात राहुन’.

माहेरवाशिणीसारखी चार भिंतीत नाचली,
मोकळ्या हाती जाईल कशी, बायको मात्र वाचली.

भिंत खचली, चूल विझली, होते नव्हते नेले,
प्रसाद म्हणून पापण्यांवरती पाणी थोडे ठेवले.

कारभारणीला घेउन संगे सर आता लढतो आहे
पडकी भिंत बांधतो आहे, चिखलगाळ काढतो आहे.

खिशाकडे हात जाताच हसत हसत उठला
‘पैसे नकोत सर’, जरा एकटेपणा वाटला.

मोडून पडला संसार तरी मोडला नाही कणा,
पाठीवरती हात ठेउन, तुम्ही फक्‍त लढ म्हणा!

Tuesday, October 4, 2016

मुहर्रम क्या है?

मुहर्रम क्या है?

हम देखते है की हर साल, मुहर्रम के मौके पर कुछ लोग “या हुसैन” के नारे लगते हुए, रोते हुए, अपने सीनो को पिटते हुए बहार निकलते है:-क्या आपने कभी सोचा की यह लोग कौन है?- यह लोग ऐसा क्यों कर रहे है?- यह मुहर्रम क्या है?- क्या मेरी ज़िन्दगी से इसका कुछ लेना देना है?मुहर्रम इस्लामी साल का पहला महिना है जो चाँद के हिसाब से चलता है जिसे हिजरी साल भी कहा जाता है. सन 61 के मुहर्रम महीने में, जो आज से तक़रीबन 1400 साल पहले गुज़रा, नबी मुहम्मद (स) के नवासे, इमाम हुसैन (अ) को उनके 72 साथियों केसाथ बेदर्दी से कर्बला, इराक़ के बियाबान में ज़ालिम यज़ीदी फ़ौज ने शहीद कर दिया था.यजीद एक ज़ालिम बादशाह था जो समाज में मज़हब के नाम पर बुरी बाते लाना चाहता था जिससे की समाजी ज़िन्दगी की मजबूती टूट जाए और इंसानियत पारा पारा हो जाए. अपने ऐशो आराम और नाजायज़ ख्वाहिशात को पूरा करने के लिए पुरे समाज को अपनी बली चडाने के लिए तैयार यज़ीद के खिलाफ कोईखड़े होने की हिम्मत नहीं कर रहा था और ऐसे में इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ उठ खड़े हुए और यजीद को अपने नाजायज़ मकासिद में कामियाब नहीं होने दिया.यजीदी फौजों ने इमाम हुसैन (अ) के छोटे से कारवान को जिसमे बूढ़े, औरते और बच्चे भी शामिल थे, कर्बला के बियाबान में घेर लिया और उन पर पानी बंद कर दिया. यजीद की बस एक ही शर्त थी;मज़हब के नाम पर उसकी नाजायज़ ख्वाहिशात के सामने अपना सर झुका दो नहीं तो शहादत के लिए तैयार हो जाओ.इमाम हुसैन (अ) के साथियों ने इमाम का ऐसे वक़्त में मजबूती से साथ दिया और यजीदी फौजों के सामने डट कर खड़े हो गए, यहाँ तक के शहादत को गले लगा लिया. ज़ालिम यज़ीदी फ़ौज ने सिर्फ उम्र में बड़े लोगो को ही नहीं शहीद किया, बल्कि छे महीने के छोटे अली असगर को भी अपने बाप की गोद में तीरके वार से शहीद कर दिया. जंग के खात्मे के बाद यज़ीदी फ़ौज ने औरतो और बच्चो को कैदी बना कर यजीद के पास शाम भेज दिया, जहाँ उन्हें कैद खानेमें सख्तियाँ झेलनी पड़ी और बहोत दिनों बाद वहां से आज़ादी मिली.हर साल 10 मुहर्रम को इसी इमाम हुसैन (अ) के इंकेलाबी कारवान की याद में मुहर्रम बरपा किया जाता है, जिसे आशुरा भी कहते है.इस रोज़ मुसलमान मस्जिदों और इमामबाड़ो में जमा हो कर इमाम हुसैन (अ) की मजलिस करते है, उनकी याद में जुलूस निकालते है, उनका अलम उठाते है (जैसा उन्होंने कर्बला के मैंदान में हक़ का झंडा उठाया था) और मातम करके अपने ग़म को ज़ाहिर करते है और ये बताते है की अगर हम कर्बला के मैदान में होते तो ज़रूर इमाम हुसैन (अ) का साथ देते और समाज को खराब होने से बचाने के लिए अपनी जान की कुर्बानी दे देते.जो कारवान इमाम हुसैन (अ) ने 1400 साल पहले शुरू किया था वह आज भी जारी है. हर साल, आज़ादी के दिल दादा और हक पर चलने वाले अफराद अपनी कसमो कोदोहराते है और अपने अन्दर की और समाज की हर बुराई के खिलाफ लड़ने की कसम खाते है.जब कभी हम दुनिया में भ्रष्टाचार और ज़ुल्म देखे और अपने आप को अकेला महसूस करे तो कर्बला के पैग़ाम को याद करे जो हमे याद दिलाता है की अगर ज़ुल्म के खिलाफ मुकाबले में अकेले हो या तादाद में कम हो तो थक कर घर में ना बैठ जाओ. सच्चाई की राह में अगर क़दम आगे बढाओगे तो याद रखो की जीत हमेशा सच्चाई की ही होगी; फिर चाहे उस सच्चाई के लिए हमें अपनी जान क्यों ना देनी पड़े.आज भी इतिहास गवाह है कि ज़ालिम यजीद का नाम मिट गया और नामे इमाम हुसैन (अ) आज तक जिंदा है और हमेशा ज़िंदा रहेगा. और जो पैग़ाम अपने क़याम से उन्होंने दिया था वो हमेशा हमेशा बाकी रहेगा. इमाम हुसैन (अ) और मुहर्रम का पैग़ाम सारी इंसानियत के लिए है और इसी रास्ते पर चलते हुए हम दुनिया को रहने के लिए एक अच्छी जगह बनाने में कामियाब हो सकते है.

Sunday, October 2, 2016

मार्कशीट

Agar kisi ki MAHARASHTRA BOARD ki 1990 se ab tak koi bhi 10th ya 12th ki marksheet ya board certificate gum ho gaya ya kharab ho gaye hai aur phir se hasil karna chahte hain to PDF Format me DOWNLOAD kar sakte hain.

website
www.boardmarksheet.maharashtra.gov.in

Dusre group me b  share karen saayad
Kisi ko kaam aa jaye.

Saturday, October 1, 2016

खारीक टाकून उकळवलेले दूध पिण्याचे फायदे

मुंबई : ज्याप्रमाणे द्राक्षे वाळवून त्यापासून मनुका तयार करतात त्याचप्रमाणे खजूर वाळवल्यानंतर खारीक तयार होतात. या खजूरमध्ये मोठ्या प्रमाणात पौष्टिक तत्वे असतात. ज्याचे सेवन आपण वर्षभर करु शकतो.

खारीकमध्ये मोठ्या प्रमाणात फायबर, लोह, कॅल्शियम, झिंक, मॅग्नेशियम असते. खारीक टाकून उकळलेले दूध प्यायल्याने शरीराला अधिक फायदा होतो.

खारीकमध्ये मोठ्या प्रमाणात व्हिटामिन ए, बी असते. जे त्वचेसाठी फायदेशीर असतात. यातील मॅग्नेशियम शरीरात जाऊन तुमची साखर नियंत्रणात ठेवते.

खारीकमध्ये फायबरर्स असल्याने पाचनतंत्र सुधारते. हाडे मजबूत होण्यासाठी खारीक टाकून उकळलेले दूध प्या.