आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरू पूर्णिमा कहते हैं. यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने चारों वेदों की भी रचना की थी . . इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है. उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है. शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक. गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को 'गुरु' कहा जाता है. गुरुब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुदेव महेश्वर: गुरु साक्षात्परब्रह्म तस्मैश्री गुरुवे नम: अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है, गुरु ही साक्षात परब्रह्म है ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं. आज गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का नमन कर आशीर्वाद लें. गीता का पाठ कर गौ माता का पूजन करें. गुरु पूर्णिमा गुरु मंत्र ऊं बृं बृहस्पतये नमः का जप करें. इससे आपकी मनोकामनाएं पूरी होंगी. गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है. गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है. आज का यह दिन गुरू को सम्मानित करने का होता है. Panditbooking की तरफ से आप सबको गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं
Thursday, July 21, 2016
Friday, July 15, 2016
👌*"प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली"*👌
*"प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली"*
पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!!
धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!
दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!!
ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!!
प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!!
ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार!
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार!!
भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार!
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!!
प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस!
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!!
प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार! तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!!
भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार!
डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !!
घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर!
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!!
अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास!
पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!!
रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय!
सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय!!
सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश!
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश!!
देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल!
अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल^^
दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ!
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ!!
सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर!
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर!!
भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ!
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड!!
अलसी, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल!
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल!
पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान!
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान!!
अल्यूमिन के पात्र का, करता है जो उपयोग!
आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग!!
फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर!
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर!!
चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति!
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति!!
रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय!
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय!!
भोजन करके खाइए, सौंफ, गुड, अजवान!
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान!!
लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान!
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान!
चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे !
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !!
सौ वर्षों तक वह जिए, लेते नाक से सांस!
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास!!
सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान!
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान!!
हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान!
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान!!
अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर!
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर!!
तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग!
मिट जाते हर उम्र में,तन में सारे रोग। 🌸
*कृपया इस जानकारी को जरूर आगे बढ़ाएं*
Aryan Newaree
Thursday, July 14, 2016
🙏 *"मेरा भारत महान...!"* 🙏
नेपाल के प्रधानमंत्री
के.पी ओली जी ने भारत के
सभी बिकाऊ अन्धविश्वासी पाखण्डी चैनलों पर बैन लगा दिया है.
जिसका
प्रमुख कारण है
इन चैनलों से रात-दिन अन्धविश्वास को बढ़ावा देना.
कुबेरलक्ष्मी धनवर्षा यन्त्र,
हनुमान रक्षा कवच आदि आदि.
नेपाल के प्रधानमंत्री यह बात भलीभाँति जानते हैं कि यदि धन वर्षा यन्त्र इतना कारगर होता तो भारत के 20 करोड़ लोग भूखे न मरते,
हनुमान रक्षाकवच इतना कारगर होता तो भारत के सभी राजनेताओं को Z+, Y श्रेणी की सुरक्षा पर लाखों खर्च न करके सबके गले में हनुमान यन्त्र लटका देते.
नेपाल के प्रधानमंत्री
ओली जी के इस फैसले का मैं स्वागत करता हूँ.
भारत के बारे में
12 ऐसे तथ्य जो मजाकिया होने के साथ सच भी हैं...
1.
भारत एक ऐसा देश है
जो कई स्थानीय भाषाओं द्वारा विभाजित है
और
एक विदेशी भाषा द्वारा एकजुट है.
2.
भारत में लोग
ट्रैफिक सिग्नल की रेड लाइट पर भले ही ना रुकें,
लेकिन अगर
एक काली बिल्ली रास्ता काट जाए तो हजारों लोग लाइन में खड़े हो जाते हैं.
अब तो लगता है
ट्रैफिक पुलिस में भी काली बिल्लियों की भर्ती करनी पड़ेगी.
3.
चीन
अपनी सरकार की वजह से तरक्की कर रहा है
और
भारत में तरक्की ना होने का सबसे बड़ा कारण उसकी अपनी सरकारें ही रही हैं.
4.
भारत का मतदाता
वोट देने से पहले उम्मीदवार की जाति देखता है,
न कि उसकी योग्यता.
अब इन लोगों को कौन समझाये कि भाई तुम देश के लिए नेता ढूंढ रहे हो,
न कि अपने लिए जीजा.
5.
भारत एक ऐसा देश है,
जहाँ एक्टर्स क्रिकेट खेल रहे हैं,
क्रिकेटर्स राजनीति खेल रहे है,
राजनेता पोर्न देख रहे हैं,
और पोर्न स्टार्स एक्टर बन रहे हैं.
6. भारत में आप
जुगाड़ से करीब-करीब सब कुछ पा सकते हैं.
7.
हम
एक ऐसे देश में रहते हैं,
जहाँ
नोबेल शान्ति पुरस्कार मिलने से पहले लगभग कोई भारतीय नहीं जानता था कि कैलाश सत्यार्थी कौन है.
लेकिन अगर एक
रशियन टेनिस खिलाड़ी
हमारे देश के एक क्रिकेटर को नहीं जानती
तो ये हमारे लिए अपमान की बात है.
8.
भारत
गरीब लोगों का
एक अमीर देश है,
भारत की जनता ने दो फिल्मों,
बाहुबली और बजरंगी भाईजान,
पर 700 करोड़ खर्च कर दिए.
9.
भारत में
किसी अनजान से
बात करना खतरनाक है,
लेकिन किसी अनजान से शादी करना बिलकुल ठीक.
10.
हम भारतीय
अपनी बेटी की पढ़ाई से ज्यादा खर्च बेटी की शादी पे कर देते हैं.
11.
हम एक ऐसे देश में
रहते है, जहाँ एक पुलिसवाले को देखकर लोग सुरक्षित महसूस करने के बजाए घबरा जाते हैं.
12.
हम भारतीय
हेलमेट सुरक्षा के लिहाज से कम,
चालान के डर से ज्यादा पहनते है
हँसी तो तब आती है...
जब
विजय माल्या को
भारत में नहीं पकड़ पाते,
और बातें
दाऊद इब्राहीम को
पाकिस्तान से लाने की करते हैं.
🙏 *"मेरा भारत महान...!"* 🙏
Tuesday, July 12, 2016
जाने पशुपतिनाथ से जुड़े विचित्र एवं आश्चर्यचकित करने वाले रहस्य !
भगवान शिव के मदिर केवल भारत में ही स्थित नहीं है बल्कि ये पुरे विश्व भर में फैले हुए है. महादेव शिव के अनेको पवित्र धाम एवं मंदिर है जिनमे कुछ को अत्यन्त महत्वपूर्ण माने जाते है. हमारे पड़ोसी देश में सम्मलित नेपाल में स्थित भगवान शिव को समर्पित पशुपतिनाथ भी उन महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है.
महादेव शिव के इस पवित्र एवं प्रसिद्ध मंदिर के बारे में कहा जाता है की यहाँ भगवान शिव की मौजूदगी है. पशुपतिनाथ मंदिर के विषय में यह मान्यता है की यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक, केदारनाथ का आधा भाग माना जाता है. भगवान शिव का यह मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू के देवपाटन गाव में बागमती नदी के तट पर स्थित है.
महादेव शिव की लीला एवं उनकी कथा अद्भुत एवं निराली है तथा भगवान शिव से जुड़े उनके रहस्य एवं उनकी लीलाएं उनके भक्तो को उनसे जोड़े रखती है.
प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग केदारनाथ का आधा भाग होने के कारण पशुपतिनाथ की महत्वत्ता भगवान शिव के भक्तो के लिए और भी अधिक बढ़ जाती है. आज हम आपको भगवान शिव के पवित्र धाम पशुपतिनाथ से कुछ विचित्र रहस्यों को बारे में बताने जा रहे है.
पशुपतिनाथ मंदिर से जुडी कथा :-
महाभारत के युद्ध में जब पांडवो ने अपने है सगे रिश्तेदारों का रक्त बहाया तो भगवान शिव इस बात से बहुत क्रोधित हो गये. वासुदेव यह जानते थे की वे भगवान शिव पांडवो से रुष्ट है अतः उन्होंने पांडवो को भगवान शिव की वंदना कर उनसे क्षमा मांगने की सलाह दी.
भगवान कृष्ण की सलाह पर पांडव भगवान शिव से क्षमा मांगने गुप्त काशी पहुंचे, परन्तु भगवान शिव पांडवो के आगमन को भांपते हुए उनके भगवान् शिव के सम्मुख पहुंचने से पूर्व ही विलुप्त हो गए.
अंत में पांडव भगवान शिव का पीछा करते करते केदारनाथ पहुंचे परन्तु भगवान शिव ने उनकी नजरो से बचने के लिए भेस का रूप धारण कर लिया तथा पास ही भेस के झुण्ड में जाकर सम्म्लित हो गए. पांडवो ने जब उन भेस के झुंड़ो को देखा तो वे भेस के रूप में परिवर्तित हुए भगवान शिव को पहचान गए. तब भगवान शिव उसी भेस के रूप में धरती में धसने लगे.
तभी भीम ने भेस रूपी भगवान शिव के पास जाकर उन्हें पकड़ लिया तथा अपनी पूरी ताकत से उन्हें रोकने लगे. अतः भगवान शिव को अपने असली रूप में आना पड़ा तथा पांडवो को उन्होंने क्षमा कर दिया.
ऐसा कहा जाता है की भगवान शिव जब पांडवो को क्षमादान कर रहे थे तब उनका आधा देह धरती में ही धसा था जो केदरनाथ पहुंच गया तथा जो उनके मुंह वाला भाग था वह उस स्थान में पशुपतिनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ.
शिवलिंग की पूजा :-
ऐसी मान्यता है की इन दोनों मंदिरों के दर्शन के बाद ही ज्योतिर्लिंग के दर्शन से पूण्य की प्राप्ति होती है. केदारनाथ में भगवान शिव रूप भेस के पीठ की पूजा की जाती है तथा पशुपतिनाथ मंदिर में उस भेस रूपी शिव के सर की पूजा होती है.
नहीं मिलती पशु योनि :-
पशुपतिनाथ मंदिर के बारे में एक और मान्यता यह भी है की इस मंदिर में भगवान शिव के दर्शन द्वारा पशु योनि की प्राप्ति नहीं होती. परन्तु इसके साथ ही यह भी मान्यता है की यदि पशुपतिनाथ के दर्शन के समय कोई व्यक्ति नंदी महाराज के दर्शन करता है तो यह तय है की उसे अगले जन्म में पशुयोनि मिलेगी.
अतः पशुपतिनाथ के दर्शन से पूर्व कभी भी नंदी महराज के दर्शन नहीं करने चाहिए.
रामायण काल के ऐसे श्राप, जिन्होंने हिला दी थी इतिहास की नींव !
प्रभु अवतार
1 . नंदी का रावण को श्राप :- एक बार रावण भगवान शिव से भेट करने कैलाश पर्वत गया तो बिछ मार्ग में ही रावण का समाना नंदी से हो गया. नंदी के मुख को देख रावण जोर-जोर से हसने लगा तथा उन्हें वानर कह क़र चिढ़ाने लगा. तब नंदी ने रावण को श्राप दिया की एक दिन वानरों के कारण ही तेरा सर्वनाश होगा.
2 . राजा अनरण्य का रावण को श्राप :- वाल्मीकि रामायण के अनुसार रघुवंश में एक परम प्रतापी राजा हुए थे, जिनका नाम अनरण्य था. जब रावण विश्वविजय करने निकला तो राजा अनरण्य से उसका भयंकर युद्ध हुई. उस युद्ध में राजा अनरण्य की मृत्यु हो गई. मरने से पहले उन्होंने रावण को श्राप दिया कि मेरे ही वंश में उत्पन्न एक युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा. इन्हीं के वंश में आगे जाकर भगवान श्रीराम ने जन्म लिया और रावण का वध किया.
3 . तपस्वनी का रावण को श्राप :- वाल्मीकि रामयाण के अनुसार एक बार एक तपस्विनी भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु की तपस्या क़र रही. आकाश मार्ग से जाते हुए रावण की नजर उस तपस्वनी पर पड़ी और वह उस पर आकर्षित हो गया. उसने तपस्विनी के बाल पकड़कर उसे लंका ले जाने की कोशिश करी परन्तु उस तपस्विनी ने अग्नि में भष्म होकर अपने प्राणो की आहुति दे दी तथा रावण को श्राप दिया की स्त्री के कारण ही तेरा नाश होगा.
4 . शूर्पणखा का रावण को श्राप :-वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण की बहन शूर्पणखा के पति का नाम विद्युतजिव्ह था. वो कालकेय नाम के राजा का सेनापति था. रावण जब विश्वयुद्ध पर निकला तो कालकेय से उसका युद्ध हुआ. उस युद्ध में रावण ने विद्युतजिव्ह का वध कर दिया. तब शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को श्राप दिया कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा.
5 . माया का रावण को श्राप :- लंकापति रावण ने अपनी पत्नी की बड़ी बहन माया के साथ भी एक बार छल किया था . माया के पति का नाम शंभर था तथा वे वैजयंतपुर के राजा थे. एक बार रावण वैजयंतपुर राजा शंभर से मिलने गया तथा उसने अपने भ्रम जाल से माया को फसा लिया व उसके पतिव्रता व्रत को भंग क़र दिया. जब राजा शंभर को इस बात का पता चला तो वह क्रोधित होकर रावण से युद्ध करने गया परन्तु रावण के सामने वो ज्यादा देर टिक न सका तथा रावण ने उसका वध क़र दिया. जब माया को रावण ने अपने साथ लंका ले जाने की कोशिश करी तो वह अपने पति के चिता में जा क़र सती हो गई और रावण को स्त्री के कारण मृत्यु का श्राप मिला.
6 .ब्राह्मण दंपत्ति का राजा दशरथ को श्राप :- वाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार जब राजा दशरथ शिकार करने वन में गए तो गलती से उन्होंने एक ब्राह्मण पुत्र का वध कर दिया. उस ब्राह्मण पुत्र के माता-पिता अंधे थे. जब उन्हें अपने पुत्र की मृत्यु का समाचार मिला तो उन्होंने राजा दशरथ को श्राप दिया कि जिस प्रकार हम पुत्र वियोग में अपने प्राणों का त्याग कर रहे हैं, उसी प्रकार तुम्हारी मृत्यु भी पुत्र वियोग के कारण ही होगी.
7 . नंदी का ब्राह्मणो को श्राप :- शिवपुराण के अनुसार जब दक्ष प्रजापति ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया था तब अनेक देवता, ऋषिगण एवं महात्मा वहां पधारे थे. जब राज दक्ष ने यज्ञ में भगवान शिव का तिस्कार किया था तब ब्राह्मणो ने भी इस पर दक्ष का साथ दिया. इसलिए नंदी ने ब्राह्मणो को श्राप देते हुए कहा था की दुष्ट ब्राह्मण स्वर्ग को ही श्रेष्ठ मानेंगे तथा क्रोध, लोभ व मोह से पूर्ण होंगे. शुद्रो का यज्ञ करवाने वाले ब्राह्मण दरिद्र होंगे.
8 . रावण को नलकुबेर का श्राप :- वाल्मीकि रामयण में यह वर्णन आया है की जब एक बार रावण अपने विश्व विजयी अभियान में निकला था तो इस अभियान के कारण वह स्वर्गलोक भी पहुंचा था . जहां रम्भा नाम की एक अप्सरा पर वह आकर्षित हो गया . जब उसने रम्भा को पकड़ने की कोशिश की तो वह बोली की में आपकी भाई कुबेर के पुत्र के लिए आरक्षित हु तथा में आपके पुत्रवधु के समान हु. परन्तु रावण ने उस अप्सरा के साथ दुराचार किया जब यह बात कुबेर के पुत्र निल कुबेर को पता चली तो उसने रावण को श्राप दिया की यदि रावण बिना किसी स्त्री के इच्छा के विरुद्ध उसे सपर्श करेगा तो उसके सर के सौ टुकड़े हो जाएंगे.
9 . नारद का भगवान विष्णु को श्राप :- पुराणों में एक कथा के अनुसार एक बार देवऋषि नारद एक स्त्री पर आकर्षित हो गये. तथा वे भगवान विष्णु के पास गये व उनसे यह वरदान माँगा की मुझे ऐसा रूप प्रदान करें की हर कोई मुझे ही देखे. भगवान विष्णु ने उन्हें वानर का मुख प्रदान किया तथा जब वे उस स्त्री के महल में गए तो हर कोई उन्हें देखने लगा परन्तु वह स्त्री उन्हें देख क़र भय से भाग गई . तब नारद मुनि ने क्रोध में आकर भगवान विष्णु को यह श्राप दिया क
Thursday, July 7, 2016
मुख़्यमंत्री राजश्री योजना
: *मुख़्यमंत्री राजश्री योजना की शुरुआत आज से*
*बिटिया के जन्म पर मिलेंगे 50 हजार रुपए*
यह राशि माँ के खाते में आएगी।
योजना के तहत बालिका जन्म के समय - 2,500/- रु.
बालिका के पहले जन्मदिन पर - 2,500 /-रु.
पहली कक्षा में प्रवेश लेने पर - 4,000 /-रु.
छठी कक्षा में प्रवेश लेने पर - 5,000/-रु.
10 वी कक्षा में प्रवेश लेने पर - 11,000/-रु.
12 वी कक्षा पास करने पर - 25,000/-रु. 👌👌🙏
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
: योजना 1जून 2016 से लागू ।: STATE BANK OF INDIA में " सुकन्या योजना " योजना शुरू की गई है, जिसमें जिनको 1 से 10 वर्ष तक की बेटी है उनको सालाना 1000/ रूपये 14 वर्ष भरने पर, यानि 14 साल में 14000/- भरने पर बेटी के 21 में वर्ष में 6,00,000/- मिलेंगे.... . सभी परिवार तक ये खबर पहुचा दो। सरकार ने ये योजना पुरे भारत भर में आयोजित की है। सभी इस का लाभ लें।bvy
अन्य ग्रुपों में भी भेजिए।
Only for GIRL child.
Please Please please forword to All😊👏🏼👏🏼👏🏼
Friday, July 1, 2016
पापा
Miss u papa
रोज का खाना बनाने वाली माँ हमें याद रहती
है,
लेकिन जीवन भर के खाने की
व्यवस्था करने वाला बाप हम भूल जाते हैं ।
.
माँ रोती है, बाप नहीं रो सकता, खुद का पिता मर जाये फ़िर
भी नहीं रो सकता,
क्योंकि छोटे भाईयों को
संभालना है,
.
माँ की मृत्यु हो जाये भी वह
नहीं रोता क्योंकि बहनों को सहारा देना होता है,
.
पत्नी हमेशा के लिये साथ छोड जाये फ़िर भी
नहीं रो सकता,
.
क्योंकि बच्चों को सांत्वना
देनी होती है ।
देवकी-यशोदा की तारीफ़ करना
चाहिये,
लेकिन बाढ में सिर पर टोकरा उठाये वासुदेव को
नहीं भूलना चाहिये...
.
राम भले ही
कौशल्या का पुत्र हो लेकिन उनके वियोग में तड़प कर जान देने वाले
दशरथ ही थे ।
.
पिता की एडी़ घिसी हुई
चप्पल देखकर उनका प्रेम समझ मे आता है,
उनकी
छेदों वाली बनियान देखकर हमें महसूस होता है कि
हमारे हिस्से के भाग्य के छेद उन्होंने ले लिये हैं...
.
लड़की को गाऊन ला देंगे,
बेटे को ट्रैक सूट ला देंगे,
लेकिन खुद पुरानी पैंट पहनते रहेंगे ।
.
बेटा कटिंग पर
पचास रुपये खर्च कर डालता है और बेटी
ब्यूटी पार्लर में,
लेकिन दाढी़
की क्रीम खत्म होने पर एकाध बार
नहाने के साबुन से ही दाढी बनाने वाला पिता
बहुतों ने देखा होगा...
.
बाप बीमार नहीं पडता,
बीमार
हो भी जाये तो तुरन्त अस्पताल नहीं जाते,
डॉक्टर ने एकाध महीने का आराम बता दिया तो
उसके माथे की सिलवटें गहरी हो
जाती हैं,
.
क्योंकि लड़की की
शादी करनी है,
.
बेटे की शिक्षा
अभी अधूरी है...
आय ना होने के बावजूद बेटे-बेटी को मेडिकल / इंजीनियरिंग
में प्रवेश करवाता है..
.
कैसे भी "ऎड्जस्ट" करके बेटे
को हर महीने पैसे भिजवाता है.. (वही
बेटा पैसा आने पर दोस्तों को पार्टी देता है) ।
.
किसी भी परीक्षा के परिणाम
आने पर माँ हमें प्रिय लगती है, क्योंकि वह
तारीफ़ करती है,
पुचकारती है,
हमारा गुणगान करती है,
.
लेकिन चुपचाप जाकर
मिठाई का पैकेट लाने वाला पिता अक्सर बैकग्राऊँड में चला जाता है...
.
पहली-पहली बार माँ बनने पर
स्त्री की खूब मिजाजपुर्सी
होती है,
.
खातिरदारी की जाती है (स्वाभाविक भी है..आखिर उसने कष्ट उठाये हैं),
.
लेकिन अस्पताल के बरामदे में बेचैनी
से घूमने वाला,
.
ब्लड ग्रुप की मैचिंग के लिये अस्वस्थ,
.
दवाईयों के लिये भागदौड करने वाले बेचारे बाप को सभी
नजरअंदाज कर देते हैं... ठोकर लगे या हल्का सा जलने पर
"ओ..माँ" शब्द ही बाहर निकलता है,
.
लेकिन बिलकुल
पास से एक ट्रक गुजर जाये तो "बाप..रे" ही मुँह से
निकलता है ।
.
दुनियाँ के हर पिताजी को समर्पित
.
पोस्ट अच्छा लगे तो प्लीज शेयर करना मत भूलना मेरे दोस्तो।