Saturday, June 18, 2016

चोर और राजा (लोक कथा)

चोर और राजा (लोक कथा)
किसी जमाने में एक चोर था। वह बड़ा ही चतुर था। लोगों का कहना था कि वह आदमी की आंखों का काजल तक उड़ा सकता था। एक दिन उस चोर ने सोचा कि जबतक वह राजधानी में नहीं जाएगा और अपना करतब नहीं दिखाएगा, तब तक चोरों के बीच उसकी धाक नहीं जमेगी। यह सोचकर वह राजधानी की ओर रवाना हुआ और वहां पहुंचकर उसने यह देखने के लिए नगर का चक्कर लगाया कि कहां क्या कर सकता है।

उसने तय कि राजा के महल से अपना काम शुरू करेगा। राजा ने रात दिन महल की रखवाली के लिए बहुतसे सिपाही तैनात कर रखे थे। बिना पकड़े गये परिन्दा भी महल में नहीं घुस सकता था। महल में एक बहुत बड़ी घड़ी लगी थी, जो दिन रात का समय बताने के लिए घंटे बजाती रहती थी।

Image : Religion.Bhaskar.com
चोर ने लोहे की कुछ कीलें इकट्ठी कीं ओर जब रात को घड़ी ने बारह बजाये तो घंटे की हर आवाज के साथ वह महल की दीवार में एक-एक कील ठोकता गया। इस तरह बिना शोर किये उसने दीवार में बारह कीलें लगा दीं, फिर उन्हें पकड पकडकर वह ऊपर चढ़ गया और महल में दाखिल हो गया। इसके बाद वह खजाने में गया और वहां से बहुत से हीरे चुरा लाया।

अगले दिन जब चोरी का पता लगा तो मंत्रियों ने राजा को इसकी खबर दी। राजा बडा हैरान और नाराज हुआ। उसने मंत्रियों को आज्ञा दी कि शहर की सड़कों पर गश्त करने के लिए सिपाहियों की संख्या दूनी कर दी जाये और अगर रात के समय किसी को भी घूमते हुए पाया जाये तो उसे चोर समझकर गिरफ्तार कर लिया जाये।

जिस समय दरबार में यह ऐलान हो रहा था, एक नागरिक के भेष में चोर मौजूद था। उसे सारी योजना की एक बात का पता चल गया। उसे फौरन यह भी मालूम हो गया कि कौन से छब्बीस सिपाही शहर में गश्त के लिए चुने गये हैं। वह सफाई से घर गया और साधु का बाना धारण करके उन छब्बीसों सिपाहियों की बीवियों से जाकर मिला। उनमें से हरेक इस बात के लिए उत्सुक थी कि उसकी पति ही चोर को पकडे ओर राजा से इनाम ले।

एक-एक करके चोर उन सबके पास गया ओर उनके हाथ देख देखकर बताया कि वह रात उसके लिए बडी शुभ है। उसके पति की पोशाक में चोर उसके घर आयेगा; लेकिन, देखो, चोर की अपने घर के अंदर मत आने देना, नहीं तो वह तुम्हें दबा लेगा। घर के सारे दरवाजे बंद कर लेना और भले ही वह पति की आवाज में बोलता सुनाई दे, उसके ऊपर जलता कोयला फेंकना। इसका नतीजा यह होगा कि चोर पकड में आ जायेगा।

सारी स्त्रियां रात को चोर के आगमन के लिए तैयार हो गईं। अपने पतियों को उन्होंने इसकी जानकारी नहीं दी। इस बीच पति अपनी गश्त पर चले गये और सवेरे चार बजे तक पहरा देते रहे। हालांकि अभी अंधेरा था, लेकिन उन्हें उस समय तक इधर उधर कोई भी दिखाई नहीं दिया तो उन्होंने सोचा कि उस रात को चोर नहीं आयेगा, यह सोचकर उन्होंने अपने घर चले जाने का फैसला किया। ज्योंही वे घर पहुंचे, स्त्रियों को संदेह हुआ और उन्होंने चोर की बताई कार्रवाई शुरू कर दी।

फल वह हुआ कि सिपाही जल गये ओर बडी मुश्किल से अपनी स्त्रियों को विश्वास दिला पाये कि वे ही उनके असली पति हैं और उनके लिए दरवाजा खोल दिया जाये। सारे पतियों के जल जाने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाया गया। दूसरे दिन राजा दरबार में आया तो उसे सारा हाल सुनाया गया। सुनकर राजा बहुत चिंतित हुआ और उसने कोतवाल को आदेश दिया कि वह स्वयं जाकर चोर पकड़े।

उस रात कोतवाल ने तैयार होकर शहर का पहरा देना शुरू किया। जब वह एक गली में जा रहा रहा था, चोर ने उसे देख कर कहा, “मैं चोर हूं।″ कोतवाल समझा कि कोई मजाक कर रहा है। उसने कहा, ″मजाक छाड़ो ओर अगर तुम चोर हो तो मेरे साथ आओ। मैं तुम्हें काठ में डाल दूंगा।″ चोर बोला, ″ठीक है। इससे मेरा क्या बिगड़ेगा!″ और वह कोतवाल के साथ काठ डालने की जगह पर पहुंचा।

वहां जाकर चोर ने कहा, ″कोतवाल साहब, इस काठ को आप इस्तेमाल कैसे किया करते हैं, मेहरबानी करके मुझे समझा दीजिए।″ कोतवाल ने कहा, तुम्हारा क्या भरोसा! मैं तुम्हें बताऊं और तुम भाग जाओ तो ?″ चोर बोला, ″आपके बिना कहे मैंने अपने को आपके हवाले कर दिया है। मैं भाग क्यों जाऊंगा?″ कोतवाल उसे यह दिखाने के लिए राजी हो गया कि काठ कैसे डाला जाता है। ज्यों ही उसने अपने हाथ-पैर उसमें डाले कि चोर ने झट चाबी घुमाकर काठ का ताला बंद कर दिया और कोतवाल को राम-राम करके चल दिया।

जाड़े की रात थी। दिन निकलते-निकलते कोतवाल मारे सर्दी के अधमरा हो गया। सवेरे जब सिपाही बाहर आने लगे तो उन्होंने देखा कि कोतवाल काठ में फंसे पड़े हैं। उन्होंने उनको उसमें से निकाला और अस्पताल ले गये।

अगले दिन जब दरबार लगा तो राजा को रात का सारा किस्सा सुनाया गया। राजा इतना हैरान हुआ कि उसने उस रात चोर की निगरानी स्वयं करने का निश्चय किया। चोर उस समय दरबार में मौजूद था और सारी बातों को सुन रहा था। रात होने पर उसने साधु का भेष बनाया और नगर
किसी जमाने में एक चोर था। वह बड़ा ही चतुर था। लोगों का कहना था कि वह आदमी की आंखों का काजल तक उड़ा सकता था। एक दिन उस चोर ने सोचा कि जबतक वह राजधानी में नहीं जाएगा और अपना करतब नहीं दिखाएगा, तब तक चोरों के बीच उसकी धाक नहीं जमेगी। यह सोचकर वह राजधानी की ओर रवाना हुआ और वहां पहुंचकर उसने यह देखने के लिए नगर का चक्कर लगाया कि कहां क्या कर सकता है।

उसने तय कि राजा के महल से अपना काम शुरू करेगा। राजा ने रात दिन महल की रखवाली के लिए बहुतसे सिपाही तैनात कर रखे थे। बिना पकड़े गये परिन्दा भी महल में नहीं घुस सकता था। महल में एक बहुत बड़ी घड़ी लगी थी, जो दिन रात का समय बताने के लिए घंटे बजाती रहती थी।

Image : Religion.Bhaskar.com
चोर ने लोहे की कुछ कीलें इकट्ठी कीं ओर जब रात को घड़ी ने बारह बजाये तो घंटे की हर आवाज के साथ वह महल की दीवार में एक-एक कील ठोकता गया। इस तरह बिना शोर किये उसने दीवार में बारह कीलें लगा दीं, फिर उन्हें पकड पकडकर वह ऊपर चढ़ गया और महल में दाखिल हो गया। इसके बाद वह खजाने में गया और वहां से बहुत से हीरे चुरा लाया।

अगले दिन जब चोरी का पता लगा तो मंत्रियों ने राजा को इसकी खबर दी। राजा बडा हैरान और नाराज हुआ। उसने मंत्रियों को आज्ञा दी कि शहर की सड़कों पर गश्त करने के लिए सिपाहियों की संख्या दूनी कर दी जाये और अगर रात के समय किसी को भी घूमते हुए पाया जाये तो उसे चोर समझकर गिरफ्तार कर लिया जाये।

जिस समय दरबार में यह ऐलान हो रहा था, एक नागरिक के भेष में चोर मौजूद था। उसे सारी योजना की एक बात का पता चल गया। उसे फौरन यह भी मालूम हो गया कि कौन से छब्बीस सिपाही शहर में गश्त के लिए चुने गये हैं। वह सफाई से घर गया और साधु का बाना धारण करके उन छब्बीसों सिपाहियों की बीवियों से जाकर मिला। उनमें से हरेक इस बात के लिए उत्सुक थी कि उसकी पति ही चोर को पकडे ओर राजा से इनाम ले।

एक-एक करके चोर उन सबके पास गया ओर उनके हाथ देख देखकर बताया कि वह रात उसके लिए बडी शुभ है। उसके पति की पोशाक में चोर उसके घर आयेगा; लेकिन, देखो, चोर की अपने घर के अंदर मत आने देना, नहीं तो वह तुम्हें दबा लेगा। घर के सारे दरवाजे बंद कर लेना और भले ही वह पति की आवाज में बोलता सुनाई दे, उसके ऊपर जलता कोयला फेंकना। इसका नतीजा यह होगा कि चोर पकड में आ जायेगा।

सारी स्त्रियां रात को चोर के आगमन के लिए तैयार हो गईं। अपने पतियों को उन्होंने इसकी जानकारी नहीं दी। इस बीच पति अपनी गश्त पर चले गये और सवेरे चार बजे तक पहरा देते रहे। हालांकि अभी अंधेरा था, लेकिन उन्हें उस समय तक इधर उधर कोई भी दिखाई नहीं दिया तो उन्होंने सोचा कि उस रात को चोर नहीं आयेगा, यह सोचकर उन्होंने अपने घर चले जाने का फैसला किया। ज्योंही वे घर पहुंचे, स्त्रियों को संदेह हुआ और उन्होंने चोर की बताई कार्रवाई शुरू कर दी।

फल वह हुआ कि सिपाही जल गये ओर बडी मुश्किल से अपनी स्त्रियों को विश्वास दिला पाये कि वे ही उनके असली पति हैं और उनके लिए दरवाजा खोल दिया जाये। सारे पतियों के जल जाने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाया गया। दूसरे दिन राजा दरबार में आया तो उसे सारा हाल सुनाया गया। सुनकर राजा बहुत चिंतित हुआ और उसने कोतवाल को आदेश दिया कि वह स्वयं जाकर चोर पकड़े।

उस रात कोतवाल ने तैयार होकर शहर का पहरा देना शुरू किया। जब वह एक गली में जा रहा रहा था, चोर ने उसे देख कर कहा, “मैं चोर हूं।″ कोतवाल समझा कि कोई मजाक कर रहा है। उसने कहा, ″मजाक छाड़ो ओर अगर तुम चोर हो तो मेरे साथ आओ। मैं तुम्हें काठ में डाल दूंगा।″ चोर बोला, ″ठीक है। इससे मेरा क्या बिगड़ेगा!″ और वह कोतवाल के साथ काठ डालने की जगह पर पहुंचा।

वहां जाकर चोर ने कहा, ″कोतवाल साहब, इस काठ को आप इस्तेमाल कैसे किया करते हैं, मेहरबानी करके मुझे समझा दीजिए।″ कोतवाल ने कहा, तुम्हारा क्या भरोसा! मैं तुम्हें बताऊं और तुम भाग जाओ तो ?″ चोर बोला, ″आपके बिना कहे मैंने अपने को आपके हवाले कर दिया है। मैं भाग क्यों जाऊंगा?″ कोतवाल उसे यह दिखाने के लिए राजी हो गया कि काठ कैसे डाला जाता है। ज्यों ही उसने अपने हाथ-पैर उसमें डाले कि चोर ने झट चाबी घुमाकर काठ का ताला बंद कर दिया और कोतवाल को राम-राम करके चल दिया।

जाड़े की रात थी। दिन निकलते-निकलते कोतवाल मारे सर्दी के अधमरा हो गया। सवेरे जब सिपाही बाहर आने लगे तो उन्होंने देखा कि कोतवाल काठ में फंसे पड़े हैं। उन्होंने उनको उसमें से निकाला और अस्पताल ले गये।

अगले दिन जब दरबार लगा तो राजा को रात का सारा किस्सा सुनाया गया। राजा इतना हैरान हुआ कि उसने उस रात चोर की निगरानी स्वयं करने का निश्चय किया। चोर उस समय दरबार में मौजूद था और सारी बातों को सुन रहा था। रात होने पर उसने साधु का भेष बनाया और नगर

Friday, June 3, 2016

लखवा (पँरालिसीस)

लखवा   (पँरालिसीस)
       नागरमुन्नोळी

मिरज पासुन ७० कि.मी चिक्कोडी पासुन १० किमी.

" नागरमुनोळ्ळी  ता.चिक्कोडी जि.बेळगाव."

चिक्कोडी  पासून
१० कि.मी.नागरमुन्नोळी म्हणून गाव आहे,
त्या गावा मध्ये
श्री डाँ .पांडुरंग कुंभार म्हणून आयर्वेदिक डाँक्टरआहेत,
ते फक्त लकव्या/ पँरालिसीस वरच औषध देतात,
लकवा कितीही पण जूना व गंभीर असू द्या, ते १००% बरा होनारच.  पेशंटचे केस पेपर्सचे
फक्त ५०/- रुपये घेतले जातात व ईंजेक्शनचे २०० रूपये. महिन्यात फक्त ५ वेळा विझीट द्यावी लागते पन पेशंट १००% कव्हरच होतो.मी आत्ता परीयेंत ३०-३५ पेशंट पाठवल जे गेले  अँब्युलन्स मध्ये पन आले चालत...    ते सर्व आता चालतात फिरतात... नाँरमल आहेत
जर कोणाला माहिती हवी असेल तर ते मला कधीही फोन करू शकतात
आपल्याकडून जर कोणाचा जीव वाचत असेल,तर या पेक्षा दुसरी कुठली सेवा असेल.
धन्यवाद.
प्रा.आश्पाक तांबोळी
पोलीस हवलदार मो.7507866612

कसे जानार?
मार्ग-: १
मिरज- चिक्कोडी- नागरमुन्नोळी

कोल्हापुर -कागल- चिक्कोडी नागरमुन्नोळी

टीप:- चिक्कोडी वरून गोकाक जानारी बस पकडणे

शेयर करा कोणत्याही गरजूला उपयोगी पडेल-

Thursday, May 26, 2016

बँक

*सभी बैंक ने यह सुविधा शुरू की है…*

आपको अपने बैंक खाते के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से अपने बैंक के निचे दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करनी है कॉल अपने आप कट जाएगी और आपके बैंक बैलेंस की जानकारी आपके फ़ोन पर SMS में आ जाएगी| अब आपको अपने बैंक बैलेंस जानने के लिए अपने ATM
की ट्रानसेक्शन को व्यर्थ करने की जरुरत नहीं है

1. Axis Bank – *09225892258*
2. Andhra Bank – *09223011300*
3. Allahabad Bank – *09224150150*
4. Bank of Baroda – *09223011311*
5. Bhartiya Mahila Bank – *09212438888*
6. Dhanlaxmi Bank – *08067747700*
7. IDBI Bank – *09212993399*
8. Kotak Mahindra Bank – *18002740110*
9. Syndicate Bank – *09664552255*
10. Punjab National Bank - *18001802222*
11. ICICI Bank – *02230256767*
12. HDFC Bank – *18002703333*
13. Bank of India – *02233598548*
14. Canara Bank – *09289292892*
15. Central Bank of India – *09222250000*
16. Karnataka Bank – *18004251445*
17. Indian Bank – *09289592895*
18. State Bank of India –
Get the balance via IVR
*1800112211 & 18004253800*
19. Union Bank of India – *09223009292*
20. UCO Bank - *09278792787*
21. Vijaya Bank – *18002665555*
22. Yes Bank – *09840909000*
23. South Indian Bank- *0922300848*
24. Bank of Maharashtra- *9222281818*

*अच्छी खबर हमेशा दुसरो के साथ शेयर करनी चाहिए...*

Tuesday, May 24, 2016

हिन्दू आणि रामायण

Fact about muslim & ajmer
रामायण में सभी राक्षसों का वध हुआ था लेकिन💥
सूर्पनखा का वध नहीं हुआ था
उसकी नाक औcर कान काट कर छोड़ दिया गया था ।
वह कपडे से अपने चेहरे को छुपा कर
रहती थी ।
रावन के मर जाने के बाद वह
अपने पति के साथ शुक्राचार्य के पास
गयी और जंगल में उनके आश्रम में रहने लगी ।
राक्षसों का वंश ख़त्म न
हो
इसलिए, शुक्राचार्य ने शिव
जी की आराधना की ।
शिव जी ने
अपना स्वरुप शिवलिंग शुक्राचार्य को दे कर
कहा की जिस दिन कोई "वैष्णव" इस पर
गंगा जल चढ़ा देगा उस दिन
राक्षसों का नाश हो जायेगा ।
उस आत्म
लिंग को शुक्राचार्य ने वैष्णव मतलब
हिन्दुओं से दूर रेगिस्तान में स्थापित
किया जो आज अरब में "मक्का मदीना" में है ।
सूर्पनखा जो उस समय चेहरा ढक कर
रहती थी वो परंपरा को उसके बच्चो ने
पूरा निभाया आज भी मुस्लिम औरतें
चेहरा ढकी रहती हैं ।
सूर्पनखा के वंसज
आज मुसलमान कहलाते हैं ।
क्युकी शुक्राचार्य ने इनको जीवन दान
दिया इस लिए ये शुक्रवार को विशेष
महत्त्व देते हैं ।
पूरी जानकारी तथ्यों पर आधारित सच है।⛳
जानिए इस्लाम केसे पैदा हुआ..
👉 असल में इस्लाम कोई धर्म नहीं है .एक मजहब है..
दिनचर्या है..
👉 मजहब का मतलब अपने कबीलों के
गिरोह को बढ़ाना..
👉 यह बात सब जानते है कि मोहम्मदी मूलरूप से
अरब वासी है ।
👉 अरब देशो में सिर्फ रेगिस्तान पाया जाता है.
वहां जंगल
नहीं है, पेड़ नहीं है. इसीलिए वहां मरने के बाद जलाने
के
लिए लकड़ी न होने के कारण ज़मीन में दफ़न कर
दिया जाता था.
👉 रेगिस्तान में हरीयाली नहीं होती.. एसे में रेगिस्तान
में
हरा चटक रंग देखकर इंसान चला आता जो की सूचक
का काम करता था..
👉 अरब देशो में लोग रेगिस्तान में तेज़ धुप में सफ़र करते थे,
इसीलिए वहां के लोग सिर को ढकने के लिए
टोपी 💂 पहनते थे.
जिससे की लोग बीमार न पड़े.
👉 अब रेगिस्तान में खेत तो नहीं थे, न फल, तो खाने के
लिए वहा अनाज नहीं होता था. इसीलिए वहा के
लोग
🐑 🐃🐄🐐🐖जानवरों को काट कर खाते थे. और अपनी भूख मिटाने के
लिए इसे क़ुर्बानी का नाम दिया गया.
👉 सब लोग एक ही कबिले के खानाबदोश होते थे इसलिए
आपस में भाई बहन ही निकाह कर लेते थे|
👉 रेगिस्तान में मिट्टी मिलती नहीं थी मुर्ती बनाने
को इसलिए मुर्ती पुजा नहीं करते थे|
खानाबदोश थे ,
👉 एक जगह से दुसरी जगह
जाना पड़ता था इसलिए कम बर्तन रखते थे और एक
थाली नें पांच लोग खाते थे|
👉 कबीले की अधिक से अधिक संख्या बढ़े इसलिए हर एक
को चार बीवी रखने की इज़ाजत दि..
🔥 अब समझे इस्लाम कोई धर्म नहीं मात्र एक कबीला है..
और इसके नियम असल में इनकी दिनचर्या है|
नोट : पोस्ट पढ़के इसके बारे में सोचो.
# इस्लाम_की_सच्चाई
अगर हर हिँदू माँ-बाप अपने बच्चों को बताए कि अजमेर दरगाह वाले ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने किस तरह इस्लाम कबूल ना करने पर पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता को मुस्लिम सैनिकों के बीच बलात्कार करने के लिए निर्वस्त्र करके फेँक दिया था और फिर किस तरह पृथ्वीराज चौहान की वीर पुत्रियों ने आत्मघाती बनकर मोइनुद्दीन चिश्ती को 72 हूरों के पास भेजा थातो शायद ही कोई हिँदू उस मुल्ले की कब्र पर माथा पटकने जाए
"अजमेर के ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती को ९० लाख हिंदुओं को इस्लाम में लाने का गौरव प्राप्त है. मोइनुद्दीन चिश्ती ने ही मोहम्मद गोरी को भारत लूटने के लिए उकसाया और आमंत्रित किया था... (सन्दर्भ - उर्दू अखबार "पाक एक्सप्रेस, न्यूयार्क १४ मई २०१२).
अधिकांश मुर्दा हिन्दू तो शेयर भी नहीं करेंगे,,धिक्कार है ऐसे हिन्दुओ पर

Saturday, May 21, 2016

सोनं

एक बार ज़रूर पढ़ें : एक्साइज ड्यूटी क्या है?

मान लीजिये आप किसी सोनार के पास गए सोना खरीदने। आपने 10 ग्राम प्योर सोना 30,000/- रुपये का खरीदा। फिर उसी सोने से उसी सोनार को हार बनाने के लिए दिया। सोनार ने आपसे कहा की 2000/- रुपये बनायी अलग से लगेगी। आपने कहा ठीक है, फिर आपने रसीद लिया और घर चले आए। इधर सोनार ने 1 ग्राम सोना निकाल लिया और 1 ग्राम का टाका लगा दिया। "क्यों बिना टाके के हार नही बन सकता?" यानी की 1 ग्राम सोना 3000/- रुपये का निकाल लिया और 2000/- रुपये बनायी अलग से ले ली। यानी आपको 5000/- रुपये का झटका लग गया। अब आपके 30 हजार रुपये सोने की किमत मात्र 25 हजार रुपये बची और सोना भी 1 ग्राम कम हो कर 9 ग्राम शेष बचा।
बात यहीं खत्म नहीं हुई उसके बाद अगर आप पुन: उसी सोने के हार को बेचने या कोई और आभूषण बनवाने पुन: उसी सोनार के पास जाते हैं तो वह सबसे पहले टाका काटता है और सफाई करने के नाम पर 0.5 ग्राम सोना झाड़ लेता है। अब आपके पास मात्र 8.5 ग्राम सोना बचता है। यानी की 32 हजार (बनाई लेकर) का सोना मात्र 25,500/- रुपये का बचा।

आप जानते हैं कि आपने : 30,000/- रुपये का सोना खरीदा + 2000/- रुपये बनायी दिए = 32,000/- रुपये 1 ग्राम का टाका यानी 3000/- रुपए = 35,000/- + 0.5 पुन: बेचने या तुड़वाने पर कटा सफाई के नाम पर = 1500/- रुपये।
शेष बचा सोना 8.5 ग्राम। यानी 32,000/- रुपये में खरीदा अब उसकी किमत 25,500/- यानी ग्राहक को घाटा = 6500/- रुपये का।

एक्साइज ड्यूटी लगने पर सोनार को रसीद के आधार पर उपभोक्ता को पूरा सोना देना होगा और जितने ग्राम का टाका लगेगा उसका सोने के तौल पर कोई फर्क नही पड़ेगा। जैसा की आपके सोने की तौल 10 ग्राम है और टाका 1 ग्राम का लगा तो सोनार को रसीद के आधार पर 11 ग्राम वजन करके उपभोक्ता को देना होगा इसी वजह से उनकी फटी पड़ी है और  यही वजह है कि सोनार हड़ताल पर हैं क्यों? क्योंकि उनकी पोल खुल गई है।

कृपया इस मैसेज को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें।

Tuesday, May 17, 2016

खर्रा

प्रश्न -- "खर्रा''  या विषयावर  सविस्तर निबंध लिहा.
गुण १५

उत्तर--
खर्रा हे एक नैसर्गिक खाद्य आहे,
ख-र्यामुळे कोणतेही दुष्परिणाम होत नाहीत.
भारतात दर १० व्यक्तींमागे ३ माणसे खर्रा खातात.
विदर्भात तर दर १० मागे ९ जण खर्रा खातात.

खर्रा खाणे ही एक कला समजली जाते, वडिलधा-या माणसांना सन्मान देण्यासाठी खर्रा दोन मिनिटे मागे लपवून ठेवावा. तरी त्यांच्या लक्षात आल्यास ते मागण्याची शक्यता असते.
खर्रा घोटणे  हे सुद्धा अतिशय कलात्मक काम समजले जाते,
ख-र्याशिवाय जीवन अपूर्ण आहे,

सध्या खर्रा सर्वत्र मिळतो आगामी काळात माँल मध्ये सुद्धा मिळेल,

खर्रा न खाल्यास मन अस्वस्थ होते, तसेच शौचास होत नाही,

खर्रा कुठेही लपवून ठेवता येतो तसेच उधारीवर कोणीही देऊ शकतो  .ख-र्याला पुण्याकडच्या भाषेत मावा म्हणतात. पण हे अतिशय पाचकळ नाव झाले. त्यात ख-र्याची मजा नाही.

खर्रा शेअर करणारे लोक अतिशय पक्के मित्र असतात,

ख-र्यामुळे तन मन प्रफुल्लित होते,खाणा-याच्या भाषेत सांगायचे म्हटलं तर "करंटच लागत नाही " ब्रम्हानंदी टाळी लागते.

खर्रा खाणारी माणसे अतिशय हुशार आणि विद्वान असतात,

एकदा का खर्रा ताेंडात गेला....
साक्षात् परमेश्वर जरी अमृत घेऊन आला तरी खर्रा थुंकला जात नाही. त्याला सुद्धा "आत्ताच खर्रा खाल्ला प्रभु " हेच उत्तर मिळते.

पानटपरीवर खर्रा खातांना ईतर खर्राप्रेमीकडुन जी माहीती मिळते ती जगातल्या कुठल्याही विश्वकाेषात मिळत नाही.

खर्रा खाल्ल्यावर कुणी कुणी आस्वाद घेताना जे माैनव्रत पाळतात तेव्हा ते खुप वर पाेचलेले तपस्वीच वाटतात.

कट्टर खर्रा खाणारा सहसा बिडी, सिगरेट, तंबाखू, पान, असले वाईट व्यसन करीत नाही.

कमी खर्चीक असलेला खर्रा फक्त ७ रुपयांपासून ते ३० रुपयांपर्यंत सुद्धा  मिळतो,

घोटा खर्रा .....
😄😄😄😄😄😄😄👏

गुण १५ पैकी १५

Monday, May 16, 2016

डायबिटीज

-- 20 वर्षों से डायबिटीज झेल रहीं 65 वर्षीय महिला जो दिन में दो बार इन्सुलिन लेने को विवश थीं, आज इस रोग से पूर्णतः मुक्त होकर सामान्य सम्पूर्ण आहार ले रही हैं | जी हाँ मिठाई भी ।।

--डाक्टरों ने उस महिला को इन्सुलिन और अन्य ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाली दवाइयां भी बंद करने की सलाह दी है ।
और एक ख़ास बात । चूंकि केवल दो सप्ताह चलने वाला यह उपचार पूर्णतः प्राकृतिक तत्वों से घर में ही निर्मित होगा, अतः इसके कोई दुष्प्रभाव होने की रत्ती भर भी संभावना नहीं है ।

--मुम्बई के किडनी विशेषज्ञ डा. टोनी अलमैदा ने दृढ़ता और धैर्य के साथ इस औषधि के व्यापक प्रयोग किये हैं तथा इसे आश्चर्यजनक माना है ।

अतः आग्रह है कि इस उपयोगी उपचार को अधिक से अधिक प्रचारित करें, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें |
देखिये कितना आसान है इस औषधि को घर में ही निर्मित करना |
आवश्यक वस्तुएं–

> 1 – गेंहू 100 gm.
> 2 – वृक्ष से निकली गोंद 100 gm.
> 3 - जौ 100 gm.
> 4 - कलुन्जी 100 gm.

--( निर्माण विधि )

उपरोक्त सभी सामग्री को ५ कप पानी में रखें । आग पर इन्हें १० मिनट उबालें । इसे स्वयं ठंडा होने दें । ठंडा होने पर इसे छानकर पानी को किसी बोतल या जग में सुरक्षित रख दें ।

--( उपयोग विधि )

सात दिन तक एक छोटा कप पानी प्रतिदिन सुबह खाली पेट लेना ।
अगले सप्ताह एक दिन छोड़कर इसी प्रकार सुबह खाली पेट पानी लेना । मात्र दो सप्ताह के इस प्रयोग के बाद आश्चर्यजनक रूप से आप पायेंगे कि आप सामान्य हो चुके हैं ...और बिना किसी समस्या के अपना नियमित सामान्य भोजन ले सकते हैं ।
जिस किसी के पेरेंट्स को प्रॉब्लम हो उपयोग करे और आगे फॉरवर्ड करे साभार -

--यह अच्छा Msg है सब ग्रुप में Frwd कर दिया जाये,
तो काफी लोग फायदा उठा सकते है.... 🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃 इस  को मैने आप तक पहुंचाने मे  र्सिफ उंगली का उपयोग किया है,
रचियता को सादर  नमन 🙏🙏🙏